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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 275 of 421

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Page 275

उत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय
सरस्वती देवी के लिए किया जा रहा है. इस यज्ञ से गोधूम ओषधियां, मधु, दूध, सोम
व घी प्राप्त होते हैं. होता सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (२९)
होता यक्षत्तनूनपात्सरस्वतीमविर्मेषो न भेषजं पथा मधुमता भरन्नश्विनेन्द्राय वीर्यं
बदरैरुपवाकाभिर्भेषजं तोक्मभिः पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य
होतर्यज.. (३०)
होता यजमान के शरीर की रक्षा के लिए यज्ञ करते हैं. यह यज्ञ अश्विनीकुमारों,
सरस्वती देवी और इंद्र देव के लिए किया जाता है. देवताओं के लिए अनाज,
ओषध, मधु, पेय, घी, दूध, सोम व घी आदि प्राप्त होते हैं. देवगण इन सब को
ग्रहण करने की कृपा करें. होता सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा
करें. (३०)
होता यक्षन्नराशं१४ सन्न नग्नहुं पतिं१४ सुरया भेषजं मेषः सरस्वती भिषग्रथो न
चन्द्र्यश्विनोर्वपाऽ इन्द्रस्य वीर्यं बदरैरुपवाकाभिर्भेषजं तोक्मभिः पयः सोमः
परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३१)
होता ने अन्न और पुष्टिकारी पदार्थों से यज्ञ किया. यज्ञ में देवताओं को
ओषधियां, बेर, अंकुरित धान आदि चढ़ाए गए. इन देवों के लिए मधु, घी, दूध व
सोम प्राप्त होते है. होता सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३१)
होता यक्षदिडेडित ऽ आजुह्वानः सरस्वतीमिन्द्रं बलेन वर्धयन्नृषभेण
गवेन्द्रियमश्विनेन्द्राय भेषजं यवैः कर्कन्धुभिर्मधु लाजैर्न मासरं पयः सोमः परिस्रुता
घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३२)
होता ने इड़ा देवी के लिए यज्ञ किया. होता ने इड़ा देवी का आह्वान किया.
होता ने इड़ा, सरस्वती देवी, इंद्र और अश्विनीकुमार की बढ़ोतरी के लिए यज्ञ
किया. होता ने उन के लिए जौ, बेर, अनाज और इंद्र देव के लिए बलदायी
ओषधियां चढ़ाईं. देवताओं के लिए मधु, घी, दूध व दही प्राप्त होते हैं. होता सब
के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३२)
होता यक्षद्बर्हिरूर्णम्म्रदा भिषङ्नासत्या भिषजाश्विनाश्वा शिशुमती भिषग्धेनुः
सरस्वती भिषग्दुह ऽ इन्द्राय भेषजं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य
होतर्यज.. (३३)
होता ने देव वैद्य अश्विनीकुमारों और सरस्वती देवी के लिए कुश का आसन
बिछाया. इंद्र देव बछड़े वाली गाय और बच्चे वाली घोड़ी के चिकित्सक हैं. उन
के लिए इस यज्ञ में मधु, घी व दूध आदि प्राप्त होते हैं. वे इस को ग्रहण करें. यजमान
सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३३)
यजुर्वेद - २७५