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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 276 of 421

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Page 276

उत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय
होता यक्षद्दुरो दिशः कवष्यो न व्यचस्वतीरश्विभ्यां न दुरो दिश ऽ इन्द्रो न रोदसी दुघे
दुहे धेनुः सरस्वत्यश्विनेन्द्राय भेषज १७ शुक्रं न ज्योतिरिन्द्रियं पयः सोमः परिस्रुता घृतं
मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३४)
होता ने दिशाओं के द्वार के लिए यज्ञ किया. विद्वान् यजमान ने अश्विनीकुमारों,
इंद्र देव तथा देवी सरस्वती के लिए यज्ञ किया. स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक देवताओं
के लिए ओषधि हुए. वाणी गौ हुई. इन्होंने सभी देवताओं के लिए दिव्य तेज और दिव्य
बल प्रदान किया. यज्ञ में देवताओं के लिए मधु, घी व दूध आदि टपकते हैं. देवगण
उन्हें ग्रहण करने व यजमान सब के कल्याण हेतु यज्ञ करने की कृपा करें. (३४)
होता यक्षत्सुपेशासोषे नक्तं दिवाश्विना समञ्जाते सरस्वत्या त्विषिमिन्द्रे न
भेषज १७ श्येनो न रजसा हृदा श्रिया न मासरं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु
व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३५)
होता ने दिनरात के लिए यज्ञ किया. होता ने अश्विनीकुमारों और सरस्वती देवी
के लिए यज्ञ किया. उस यज्ञ से दिनरात में स्थित प्रकाश ने मन एवं श्रिया के साथ
मांड, ओषधि तथा श्येन पत्र ने चमक को इंद्र देव में स्थापित किया. उन के लिए
मधु, घी व दूध प्राप्त होता है. देवगण उन्हें ग्रहण करने की कृपा करें. यजमान सब
के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३५)
होता यक्षद्दैव्या होतारा भिषजाश्विनेन्द्रं न जागृवि दिवा नक्तं न भेषजैः शूष १७ सरस्वती
भिषक् सीसेन दुह ऽ इन्द्रियं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३६)
दिव्य होता ने देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों तथा इंद्र देव को प्रसन्न करने
के लिए यज्ञ किया. सरस्वती देवी योग्य वैद्या और दिनरात काम में लगी रहती हैं.
उन्होंने सीसा से (धातु) शक्ति और बल को दुहा. उस यज्ञ में देव के लिए मधु, घी
और दूध प्राप्त होता है. देवगण उन्हें ग्रहण करने की कृपा करें. यजमान सब के
कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३६)
होता यक्षत्तिस्रो देवीर्न भेषजं त्रयस्त्रिधातवोपसो रूपमिन्द्रे हिरण्ययमश्विनेडा न भारती
वाचा सरस्वती मह ऽ इन्द्राय दुह ऽ इन्द्रियं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य
होतर्यज.. (३७)
होता ने भारती देवी, वाणी देवी और सरस्वती देवी के लिए यज्ञ किया. उस
ने इंद्र देव तथा अश्विनीकुमारों के लिए यज्ञ किया. उस ने तीनों गुणों को धारण
करने वाले मंत्रों से यज्ञ किया. सरस्वती देवी ज्योतिर्मय स्वरूप वाली हैं. उन्होंने इंद्र
देव के लिए बल को दुहा. यज्ञ में इंद्र देव के लिए मधु, घी व दूध प्राप्त होते हैं. वे
उन्हें ग्रहण करने की कृपा करें. यजमान सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की
कृपा करें. (३७)
२७६ - यजुर्वेद