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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 152 of 421

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Page 152

पूर्वार्ध बारहवां अध्याय
कामं कामदुघे धुक्ष्व मित्राय वरुणाय च.
इन्द्रायाश्विभ्यां पूष्णे प्रजाभ्य ऽ ओषधीभ्यः.. (७२)
हल सभी कामनाओं का दोहन करने वाले हैं. मित्र देव और वरुण देव के लिए
इंद्र देव तथा अश्विनी देव के लिए पूषा देव एवं प्रजागण के लिए ओषधियां
उपलब्ध कराने वाले हैं. ( ७२ )
विमुच्यध्वमघ्न्या देवयाना ऽ अगन्म तमस्सपारमस्य. ज्योतिरापाम.. (७३)
मनुष्य अवध्य और यज्ञ के द्वारा देव मार्ग पर ले जाते हैं. आप संसार के पार
ले जाने वाले हैं. हम ईश्वर की कृपा से ज्योति को प्राप्त करें. ( ७३ )
सजूरब्दो अयवोभिः सजूरुषा ऽ अरुणीभिः.
सजोषसावाश्विना द ँश्व सोभिः सजूः सूर ऽ एतशेन सजूर्वैश्वानर ऽ इडया घृतेन
स्वाहा.. (७४)
महीने, दिन और वर्ष से प्रेम रखने वाले के लिए स्वाहा. लाल किरणों से प्रेम
रखने वाली उषा देवी के लिए स्वाहा. चिकित्सकीय कार्यों से प्रेम रखने वाले
अश्विनी देवों के लिए स्वाहा. घोड़ों से प्रेम रखने वाले सूर्य देवों के लिए स्वाहा.
घी से प्रेम रखने वाले अग्नि देव के लिए स्वाहा. ( ७४ )
या ऽ ओषधीः पूर्वा जाता देवेभ्यस्त्रियुगं पुरा.
मनै नु बभ्रूणामह ँश्व शतं धामानि सप्त च.. (७५)
पहले देवताओं के लिए तीन युग में ओषधियां उत्पन्न हुई हैं. हमें सैकड़ों धाम
और सात धान्यों की क्षमता का ज्ञान है. ओषधियां पक कर भूरेपीले रंग की हो जाती
हैं. ( ७५ )
शतं वो अम्ब धामानि सहस्रमुत वो रुहः.
अधा शतक्रत्वो यूयमिमं मे अगदं कृत.. (७६)
ओषधियों के सैकड़ों नाम हैं. मां के समान गुण युक्त हैं. उन के सैकड़ों
धाम हैं. वे सैकड़ों यज्ञ कराने वाली हैं. आप हमारे अंगों को पुष्ट करने की कृपा
कीजिए. ( ७६ )
ओषधीः प्रति मोदध्वं पुष्पवतीः प्रसूवरीः.
अश्वा ऽ इव सजित्त्वरीर्वीरुधः पारयिष्ण्वः.. (७७)
ओषधियां पुष्पवती हैं. फल उपजाने वाले गुणों से युक्त हैं. ओषधियां हमें
आनंद प्रदान करने वाली और घोड़े की तरह वेगवती हैं. रुकावटों ( बीमारियों ) को
तेजी से दूर ( नष्ट ) करने की कृपा करें. ( ७७ )
१५२ - यजुर्वेद