यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextबारहवां अध्याय
दृशानो रुक्म ऽ उर्व्या व्यद्यौद् दुर्मर्षमायुः श्रिये रुचानः.
अग्निरमृतो अभवद्वयोभिर्यदेनं द्यौरजनयत्सुरेताः.. ( १ )
सूर्य पूर्व दिशा में दृष्टिगोचर हो रहे हैं. उन की आज की दिनभर की आयु
संघर्षपूर्ण है. वे शोभा के लिए प्रकाशित हो रहे हैं. यजमानों ने जब स्वर्गलोक से
सूर्य को प्रकट किया तब हवि ग्रहण करने के लिए वे अग्निरूप में आ गए. ( १ )
नक्तोषासा समनसा विरूपे धापयेते शिशुमेक ँ४ समीची.
द्यावाक्षामा रुक्मो अन्तर्विभाति देवा ऽ अग्निं धारयन्द्रविणोदाः.. ( २ )
सूर्य समान मन से सुबह और दिन की यात्रा करते हैं. एक दूसरे से बिलकुल
अलग रूप वाले एक शिशु को ये देव उपयुक्त रीति से पोषित करते हैं. सूर्य
स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के बीच चमकते हैं. वैसे ही धनदाता देवगण अग्नि को
धारते हैं. ( २ )
विश्वा रूपाणि प्रति मुञ्चते कविः प्रासावीद्भद्रं द्विपदे चतुष्पदे.
वि नाकमख्यत्सविता वरेण्योऽनु प्रयाणमुषसो वि राजति.. ( ३ )
सूर्य विश्व रूप व कवि हैं. वे दोपायों और चौपायों का कल्याण करते हैं. वे
वरेण्य हैं. वे सभी को प्रेरित करते हैं. वे उषा देवी के जाने के बाद आकाश में
शोभित होते हैं. ( ३ )
सुपर्णोऽसि गरुत्माँस्त्रिवृत्ते शिरो गायत्रं चक्षुर्बृहद्रथन्तरे पक्षौ.
स्तोम ऽ आत्मा छन्दा ँ४ स्यङ्गानि यजू ँ४ षि नाम.
साम ते तनूर्वामदेव्यं यज्ञायज्ञियं पुच्छं धिष्ण्याः शफाः.
सुपर्णोऽसि गरुत्मान्दिवं गच्छ स्वः पत.. ( ४ )
हे सविता देव! आप गरुड़ स्वरूप हैं. त्रिवृत् स्तोम आप का सिर है. गायत्री
छंद आप के नेत्र हैं. बृहत्साम और रथंतर साम आप के दोनों पंख हैं. पंचदश
स्तोम आप की आत्मा हैं. छंद आप के अंग हैं. सब यजु आप के नाम हैं. साम
आप का शरीर है. यज्ञायज्ञिय साम आप की पूंछ हैं. धिष्णियों में निहित अग्नि
१४० - यजुर्वेद