Skip to content
SarvaKosh
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 139 of 421

Read in context
Page 139

पूर्वार्ध ग्यारहवां अध्याय
द १४ ष्ट्राभ्यां मलिम्लूञ्जम्भ्यैस्तस्कराँ २ उत.
हनुभ्या १४ स्तेनान् भगवस्ताँस्तव खाद सुखादितान्.. (७८)
हे अग्नि! आप दुष्टों को अपनी दाढ़ों से समूल नष्ट करने की कृपा करें. आप
डाकुओं को अपने दांतों से समूल नष्ट करने की कृपा करें. आप चोरों को अपनी
दाढ़ी से समूल नष्ट करने की कृपा करें. आप गड्ढा खोद कर शत्रुओं को गाड़
दीजिए. आप सत्कर्म की कृपा करें. ( ७८ )
ये जनेषु मलिम्लव: स्तेनासस्तस्करा वने.
ये कक्षेष्वधायवस्ताँस्ते दधामि जम्भयो:.. (७९)
हे अग्नि! जो मनुष्य में मलिन, चोर, जो मनुष्य में डाकू, वनचर डाकू, जो
मनुष्यों की कांख में घात कर के मारने वाले हैं, उन्हें आप अपनी दाढ़ों में धारण
कर के मार डालिए. ( ७९ )
यो अस्मभ्यमरातीयाद्यश्च नो द्वेषते जन:.
निन्दाद्यो अस्मान्धित्साच्च सर्वं तं मस्मसा कुरु.. (८०)
हे अग्नि! जो लोग हम से द्वेष करें, आप उन सब का नाश करने की कृपा
कीजिए. आप उन सभी का नाश करने की कृपा कीजिए, जो हमारी निडरता में
बाधक बनें और जो हमारी निंदा करते हैं. ( ८० )
स १४ शितं मे ब्रह्म स १४ शितं वीर्यं बलम्.
स १४ शितं क्षत्रं जिष्णु यस्याहमस्मि पुरोहित:.. (८१)
हे अग्नि! आप की कृपा से जिस यजमान के यज्ञ के हम पुरोहित हैं, उस
यजमान के वीर्य, बल, ज्ञान व जीतने योग्य क्षात्रबल की बढ़ोतरी करने की कृपा
कीजिए. आप उस यजमान को विजयशील बनाने की कृपा कीजिए. ( ८१ )
उदेषां बाहू अतिरमुद्धर्षो अथो बलम्.
क्षिणोमि ब्रह्मणा ऽ मित्रान्नुन्नयामि स्वाँ २ अहम्.. (८२)
हे अग्नि! आप की कृपा से उन दुष्ट शत्रुओं के बाहुबल की बजाय हमारे
पराक्रम की बढ़ोतरी हो. आप की कृपा से हमारे अर्थ व बल की बढ़ोतरी हो. अपने
ब्रह्मज्ञान से अमित्रों का नाश करें. हम अपने स्वजनों को ऊंचा उठा सकें. ( ८२ )
अन्नपतेन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिण:.
प्रप्र दातारं तारिष ऽ ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे.. (८३)
हे अग्नि! आप अन्नपति हैं. आप हमें रोग रहित बनाने व पोषकता देने की कृपा
कीजिए. हे अग्नि! आप दाता को पोषण देने की कृपा कीजिए. हे अग्नि! आप
दोपायों व चौपायों के लिए ऊर्जा धारण की कृपा कीजिए. ( ८३ )
यजुर्वेद - १३९