तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा
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तिरुक्कुरळ् में धर्म के जिज्ञासुओं के लिए, अर्थ (राजनीति) विभाग के
छोटे-बड़े सभी कार्य-कर्त्ताओं के लिए व ज्ञान के अन्वेषकों के लिए ही नहीं,
अपितु काव्य व काम-रस के इच्छुकों के लिए भी मनोवांछित सामग्री यथेष्ट
मात्रा में प्राप्त हो सकती है। यह उत्तम जीवन का उत्तम पथ-प्रदर्शक है। अतः
हम कह सकते हैं कि तिरुक्कुरळ्—
धर्म के जिज्ञासुओं को धर्म-ग्रन्थ महान है,
राजनीति विदग्ध को यह राज्य-ग्रन्थ महान है।
ज्ञान का जो भान चाहें, ज्ञान-ग्रन्थ महान है,
काव्य-रस के रसिक जन को काव्य-ग्रन्थ महान है॥
प्रेम-रस के पाठकों को प्रेम-ग्रन्थ महान है,
ब्रह्म-सुख-खोजी को ब्रह्मानन्द-ग्रन्थ महान है॥
जीवनोत्तम पथ-प्रदर्शन हेतु ग्रन्थ महान है,
दिव्य-विद्या-ज्ञानार्जन हेतु ग्रन्थ महान है॥
दो०—तिरुक्कुरळ् पथ के पथिक, होंगे यहाँ सानन्द।
उन्हें प्राप्त होगा वहाँ, निज पद ब्रह्मानन्द॥
तिरुक्कुरळ् एवं उसके लेखक तिरुवळ्ळुवर के अनेक नाम हैं जिनमें नौ
प्रधान हैं। वे हैं—
ग्रन्थ के नाम लेखक के नाम
(१) तिरुक्कुरळ् तिरुवळ्ळुवर
(२) मुप्पानूल् नायनार
(३) उत्तरवेदम देवर
(४) देय्वनूल् मुदर्पावलर
(५) तिरुवळ्ळुवर देय्वप्पुलवर