तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
by सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत')
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रचयिताओं ने प्राप्त से अप्राप्त की ओर जाने के अतिरिक्त अपने विचार-क्षेत्र को
इतना विशाल बनाया हो कि देश-काल के बन्धनों से हटकर सभी देशों तथा
कालों के लिए समानतः उचित व युक्तियुक्त सिद्ध हुआ हो । भारत में
ऐसे कतिपय विचारक हो चुके हैं जिन्होंने इस ढंग से अपने विचारों को व्यक्त
किया है । वे मानवमात्र के लिए सदा माननीय महत्तम आदर्श स्थापित
कर गये हैं । इन्हीं विरले व्यक्तियों में से एक थे तिरुवळ्ळुवर जिन्होंने वस्तुतः
वास्तविक भारत को अभिव्यक्त किया है । प्राचीन भारत की खोज करने पर यही
विचार-विशेष गुप्त रूप से सर्वत्र व्याप्त प्रतीत होगा । वस्तुतः इसे मानवमात्र की
सभ्यता की शाश्वत ग्रन्थिका कह सकते हैं । यदि कहा जाय कि संसार की
मानव-संस्कृति का मूल-सूत्र तिरुवळ्ळुवर के 'तिरुक्कुरळ्' में निहित है तो
युक्तियुक्त ही होगा ।
'तिरुक्कुरळ्' तमिळ साहित्य का गौरव है और भारतीय साहित्य का
भव्य भूषण है । विश्व साहित्य में इसका एक विशेष स्थान है । संस्कृत
साहित्य में जो स्थान वेद व भगवद्गीता को प्राप्त है वही स्थान तमिळ साहित्य में
तिरुक्कुरळ् को प्राप्त है ।¹ इसे 'तमिळ वेद'² भी कहते हैं । यह एक
अत्यन्त समादृत ग्रन्थ है । इसमें उल्लिखित तत्त्वों को हृदयंगम करने के पश्चात्
कोई भी व्यक्ति इसकी महानता पर विश्वास किये बिना नहीं रह सकता ।
- "The Tirukkural of Tiruvalluvar is the pride of South
India. What the Bhagvatgita is to the Sanskritist, the
Tirukkural is to the Lover of Tamil". Sri V. R. Rama-
chandra Dikshitar’s ‘Tirukkural’ with English Translation
(p. IX) Preface. - 'தமிழ் மறை'—மறை के शाब्दिक अर्थ हैं—रहस्य, वेद, उपनिषद्,
आगम्, आश्रय आदि । Tamil Lexicon, p. 3124, 3125).