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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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पाँच गधोंवाला सौदागर
एक बार महाराज कृष्णदेव राय और तेनाली राम साथ-साथ पड़ोसी राज्य के एक शहर
सौरभ नगर भ्रमण करने के लिए गए। दोनों सौदागर के वेश में थे। उन दिनों यह आम
प्रचलन था कि राजा-महाराजा जीवन और जगत में हो रहे परिवर्तनों को जानने के लिए
समय-समय पर ऐसे ही वेश बदलकर घूमने के लिए निकल जाया करते थे।
सौरभ नगर में ये दोनों एक धर्मशाला में ठहरे। इस धर्मशाला में और बहुत से सौदागर
ठहरे हुए थे। महाराज उत्सुकता से उन सौदागरों को अपने कमरे से निहार रहे थे।
तेनाली राम ने उन्हें इस तरह उत्सुक देखा तो पूछा, “क्या बात है महाराज, इस तरह
आप हर आने-जानेवालों को क्यों देख रहे हैं? यह तो धर्मशाला है। यहाँ इसी तरह लोग
आते-जाते रहेंगे। इनमें कोई अच्छा सौदागर होगा तो कोई बुरा। कोई बेशकीमती चीजें
बेचनेवाला होगा तो कोई बात बेचकर पैसे कमाता होगा।”
महाराज कृष्णदेव राय ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं तेनाली राम! मैं हर आने-जानेवाले
को नहीं देख रहा। मैं तो सामने के कमरे में ठहरे उस अजीबो-गरीब परिधानवाले सौदागर
को देख रहा हूँ जो अपने साथ पाँच गधों को भी अपने कमरे में रखे हुए है और उन्हें प्यार
से सहला रहा है। मैंने अब से पहले कमरे में पालतू कुत्ते, बिल्लियाँ, खरगोश, तोते, कबूतर
आदि तो देखे थे मगर किसी को अपने कमरे में गधा रखते नहीं देखा था। इस कारण ही मुझे
उत्सुकता हो रही है कि अपने साथ कमरे में गधों को रखनेवाला यह सौदागर कौन है तथा
किस चीज के सौदे के लिए यहाँ ठहरा है...।”
“तो इसमें कौन-सी बड़ी बात है महाराज! हम लोग बाहर निकलेंगे तो यह बात आसानी
से पता लग जाएगी।”
महाराज और तेनाली राम दोनों ही थोड़ी देर के बाद बाजार जाने के लिए अपने-अपने
कमरों से बाहर निकले। दोनों जब धर्मशाला के मुख्य द्वार के पास पहुँचे तो तेनाली राम
ने महाराज से कहा, “महाराज! तनिक ठहरिए।”
महाराज ने तेनाली राम की ओर प्रश्नसूचक-दृष्टि से देखा तो तेनाली राम ने कहा, “आइए
महाराज, धर्मशाला के व्यवस्थापक का कक्ष मुख्य द्वार के पास ही है। जरा चलिए, उस
सौदागर के बारे में पता चल जाएगा कि वह कौन है, कहाँ से आया है और किस चीज का
सौदा करता है!”