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सर्वकोश
तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 118 में से

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पृष्ठ 47

तभी त्रिपुंड्रधारी पुजारी ने मुस्कुराते हुए कोमल स्वरों में कहा, “महाराज, आपने पहली
भेंट में बताया था कि आपके दरबार में ज्ञानी और विभिन्न विधाओं में पारंगत सभासद हैं।
इसलिए मैंने यह आशीर्वाद दिया है। संशय में न रहो और मुझे जाने दो।”
त्रिपुंड्रधारी पुजारी की राह रोकने के लिए उद्यत सभासद को तभी तेनाली राम ने कहा,
“पुजारी जी के मार्ग में कोई अवरोध उत्पन्न न करो। उनके आशीष को समझो और उन्हें
जाने दो!”
तेनाली राम के ऐसा कहने पर सभासद पुजारी की राह से हट गया और पुजारी
राजभवन से विदा हो गए।
पुजारी जी की बात सुनकर महाराज खिन्न हो चुके थे इसलिए वे भी बिना कोई
औपचारिकता निभाए राजभवन से बाहर चले गए। सभा विसर्जित हो गई।
राजभवन से सबके चले जाने के बाद तेनाली राम भी भारी कदमों से अपने घर की ओर
चल पड़ा। आज त्रिपुंड्रधारी पुजारी के बचाव के लिए आगे आने के कारण सभी सभासदों
की दृष्टि में उसने अपने लिए आक्रोश देखा था। महाराज ने भी राजभवन से जाते समय उसे
उपेक्षा-भरी आँखों से देखा था। तेनाली राम समझ चुका था कि पुजारी जी का बचाव करने
के कारण सभी उस पर कुपित हैं। मन-ही-मन पूरे घटनाक्रम पर विचार करता हुआ तेनाली
राम अपने घर पहुँचा और अनमने ढंग से हाथ-पाँव धोकर अपनी घरेलू दिनचर्या में लग
गया। सुबह तक वह मानसिक रूप से राजभवन में अपने ऊपर सभासदों के सम्भावित
प्रहारों और महाराज के कोप-निवारण के लिए तैयार हो चुका था।
आम दिनों की तरह ही तेनाली राम प्रफुल्लित भाव से अपने आसन पर बैठा। महाराज के
आने पर सभा की कार्रवाई शुरू हुई। एक सभासद ने कल राजदरबार में त्रिपुंड्रधारी
पुजारी के आशीष की पंक्तियाँ सुनाते हुए कहा, “महाराज! मैं विनयपूर्वक आग्रह कर रहा
हूँ कि माननीय सभासद तेनाली राम कृपापूर्वक स्पष्ट करें कि इन शापभरी पंक्तियों को
उन्होंने आशीष की संज्ञा देकर उस त्रिपुंड्रधारी ढोंगी का बचाव क्यों किया?”
महाराज ने भी तत्काल कहा, “हाँ, तेनाली राम! स्पष्ट करो कि पुजारी जी की बातों का
तुमने क्या सार निकाला था कि सबको शाप लगनेवाली बातें तुम्हें आशीष लगीं!”
महाराज गम्भीर थे। उन्होंने कहा, “वैसे वह पुजारी जी बहुत विज्ञपुरुष हैं-हो सकता है,
उनकी बातों का कोई गूढ़ार्थ हो!”
महाराज का आदेश मिलते ही तेनाली राम ने कहा, “महाराज! पुजारी जी की बातों का
कोई गूढार्थ नहीं है। उन्होंने एक सभासद के विरोध पर यह कहा था कि आपने उनसे कहा
था कि आपकी सभा में विज्ञ सभासद हैं। उन्होंने जाते-जाते सभासदों को यह बात सुनाकर
उन्हें मानसिक रूप से सजग होने को कहा। पंडित जी ने अपने आशीर्वचन में यही तो कहा