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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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ईमानदारी
महाराज कृष्णदेव राय कभी-कभी अपने दरबार में इतने सहज हो जाते थे कि उन्हें देखकर
कोई कह नहीं सकता था कि वे एक कुशल प्रशासक, कुशल राजनीतिज्ञ और अनुशासनप्रिय
शासक हैं। जिस दिन महाराज में सहजता दिखती, उस दिन आम सभासद भी मस्ती में
आ जाते। सभा भवन में हँसी, ठिठोली, बहस, बतरस सब कुछ होता।
तेनाली राम एकमात्र ऐसा सभासद था जो यह समझता था कि महाराज का अचानक
सहज हो जाना और सभासदों को इस तरह ढील देना भी उनकी शासन-नीति का हिस्सा
है। इससे महाराज अपने सभासदों की मूल प्रवृत्तियों को समझने का प्रयास करते हैं।
सभासदों में खुलापन आते ही थोड़ी-बहुत उच्छृंखलता भी आ जाती थी जिसे उस दिन
महाराज क्षम्य मानते थे लेकिन उच्छृंखल होने वाले सभासदों के प्रति उनका व्यवहार बाद
में बदल जाता था। वे ऐसे सभासदों से कड़ाई से पेश आते और आदेशात्मक होकर छोटी
पंक्तियों में बातें करते।
एक दिन तेनाली राम थोड़ी देर से सभाभवन में पहुँचा। उस समय एक सभासद कोई
मनोरंजक घटना सुना रहा था। उसकी बातें समाप्त होने पर सभी सभासद हँस पड़े।
महाराज भी खूब हँसे। चूँकि तेनाली राम ने पहले कही गई बातें नहीं सुनी थीं इसलिए वह
नहीं हँसा। अपने आसन पर गम्भीर बना बैठा रहा। महाराज ने उसे देखा और महसूस
किया कि सबके हँसने में तेनाली राम साथ नहीं दे रहा है। महाराज को यह बात बुरी
लगी मगर उन्होंने उस समय तेनाली राम से कुछ नहीं कहा।
न जाने कैसे सभासदों के बीच दान-पुण्य, धर्म-कर्म और ईमानदारी पर बहस होने लगी।
एक सभासद ने कहा, “महाराज! मेरे विचार से धनवान लोग गरीबों की तुलना में
अधिक ईमानदार होते हैं। वे स्वयं साधन-सम्पन्न होते हैं। आवश्यकता की प्रत्येक वस्तु उन्हें
उपलब्ध होती है इसलिए छोटी-छोटी चीजों के लिए उनका ईमान नहीं डोलता। वे दान-
पुण्य करते हैं इसलिए उनमें धार्मिक भावना भी विद्यमान रहती है जबकि गरीबों का
ईमान जल्दी ही डोल जाता है।”
तेनाली राम, जो अब तक चुप था, इस सभासद की बातें सुनने के बाद अपने आसन से
उठा और बोला, “महाराज! मैं माननीय सभासद के इस कथन से सहमत नहीं हूँ। मेरा
विश्वास है कि गरीब आदमी अधिक धर्मभीरु होता है। वह भगवान से डरता है, इसलिए
वह गलत काम करने से बचता है। ईश्वर का भय गरीबों को इतना अधिक होता है कि
उसका ईमान इसी भय के कारण डोलता नहीं। धनवान में ईश्वर का भय इस तरह का नहीं