तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन
Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)
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Read in contextतेनाली राम का न्याय
महाराज कृष्णदेव राय अपने सभासदों के साथ अपने राजदरबार में बैठे थे। किसी विषय
पर बहस चल रही थी। महाराज गौर से सभासदों के विचार सुन रहे थे। इसी बीच एक
गरीब व्यक्ति फरियादी के रूप में दरबार में उपस्थित हुआ और महाराज के समक्ष हाथ
जोड़कर खड़ा हो गया।
महाराज ने उसकी तरफ देखा तो वह सिसकते हुए बोला, “महाराज! फरियादी हूँ।
आपके पास अपनी फरियाद लेकर आया हूँ।”
महाराज ने उससे कहा, “बोलो! तुम्हारी क्या फरियाद है और तुम क्या चाहते हो?”
“महाराज! मैं गड़रिया हूँ। भेड़-बकरियाँ पालना मेरा पुश्तैनी धन्धा है। मेरे परिवार
का भरण-पोषण इन्हीं भेड़-बकरियों से होता है। मेरे पड़ोस में एक व्यक्ति पक्के मकान में
रहता है। वह साधन-सम्पन्न होते हुए भी मुझसे ईर्ष्या रखता है। इसी ईर्ष्या के कारण उसने
मेरी झोंपड़ी से सटाकर अपनी जमीन में ऊंची दीवार खड़ी करवा ली कि मेरी बकरियाँ
उसके अहाते में चरने न जा सकें। कल तेज बारिश में उसकी वह दीवार ढह गई और दीवार
के मलवे में दबकर मेरी दस बकरियाँ मर गईं। मुझ गरीब को इससे बहुत हानि हुई है
जिसकी भरपाई होनी चाहिए, नहीं तो मेरा परिवार चलाना कठिन हो जाएगा।”
महाराज कुछ बोलते, उससे पहले ही तेनाली राम ने कहा, “इस घटना में तो नुकसान की
भरपाई उसे करनी चाहिए जिसकी दीवार गिरी है।”
“जी हाँ, महाराज! मुझे न्याय मिल जाए। इसी आशा में मैं हाथ जोड़े खड़ा हूँ।”
फरियादी ने कहा।
महाराज ने तेनाली राम से कहा, “तेनाली राम! इस फरियादी की व्यथा-कथा सुनकर
तुम जो भी उचित हो, करो।”
“जैसी आज्ञा महाराज!“
तेनाली राम ने कहा और प्रहरी को भेजकर उसने फरियादी के पड़ोसी को दरबार में
बुलवा लिया। तेनाली राम ने फरियादी के पड़ोसी से कहा, “तुम्हारे मकान की दीवार
ढहने से इस व्यक्ति की दस बकरियाँ मर गईं। इसको हुई इस अप्रत्याशित क्षति की भरपाई
तो तुम्हें करनी होगी।“