तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 20, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहाराज खुश होते हुए बोले, “अरे, मेरे ध्यान में तो यह बात ही नहीं आई थी! तुम ठीक
कह रहे हो तेनाली राम! ऐसा हो सकता है।”
थोड़ी दूर घोड़ा और दौड़ा तब तेनाली राम ने भूमि पर बड़े पत्तोंवाली लताएँ बिछी हुई
देखीं। इन लताओं के कुछ पत्तों पर जानवरों के खुरों और पंजों के कीचड़ सने निशान थे।
इनमें से कुछ निशान कच्चे थे तो कुछ सूखे यानी गीली मिट्टीवाले निशान और सूखी
मिट्टीवाले निशान।
तेनाली राम ने महाराज को उन निशानों को दिखाते हुए कहा, “महाराज, घोड़े को उस
ओर ले चलें जिधर से पंजों और खुरों के निशान आते दिखाई पड़ रहे हैं।” ऐसा कहते हुए
तेनाली राम ने स्वयं अपना घोड़ा मोड़ लिया।
महाराज समझ नहीं पाए कि तेनाली राम किन निशानों की बात कर रहा है। वे थक चुके
थे और पसीने से लथपथ हो चुके थे। उन्हें बोलने की इच्छा नहीं हुई इसलिए उन्होंने
चुपचाप घोड़े को तेनाली राम के घोड़े के पीछे लगा दिया।
थोड़ी ही दूरी पर उन्हें एक नदी दिखाई पड़ी। दोनों ने नदी की धारा में हाथ-मुँह धोए।
फिर जी भर के पानी पीया। जब उनकी प्यास बुझ गई तब वे अपने घोड़ों को ले आए।
दोनों घोड़ों ने भी पानी पीया।
महाराज ने तेनाली राम से कहा, “तेनाली राम, मैं कामना करता हूँ कि दूसरी
सम्भावना भी सच साबित हो जाए।”
“जी हाँ, महाराज, नदी है तो आस-पास कोई बस्ती भी होगी। पहले थोड़ा विश्राम कर लें
फिर देखते हैं कि आगे क्या है।” इतना कहकर तेनाली राम ने दोनों घोड़ों को ऐसे स्थान
पर ले जाकर बाँध दिया जहाँ हरी घास दूर तक भूमि पर आच्छादित थी। उसने घोड़ों को
वहीं छोड़ दिया और स्वयं महाराज के पास आ गया। उसने महाराज से कहा, “महाराज!
आइए, नदी के किनारे बालू पर हम लोग थोड़ी देर लेट लें। थोड़े विश्राम के बाद सोचेंगे कि
अब क्या करना है और किधर जाना है।”
महाराज थके हुए तो थे ही, उन्होंने बालू पर लेटते हुए कहा, “लेकिन तेनाली राम! थोड़ी
ही देर में शाम हो जाएगी। ऊपर से, यह नदी का किनारा है। कभी भी कोई जंगली जानवर
इधर पानी पीने के लिए आ सकता है।“
महाराज के पास ही तेनाली राम लेट गया और कहा, “महाराज, जंगली जन्तुओं से भय
की आवश्यकता नहीं। इस समय यदि कोई भी जीव इधर आया तो विश्वास कीजिए कि वह
शिकार करके अपना पेट भर चुका होगा। वैसे भी मनुष्य से सभी भी जानवर स्वयं भयभीत
रहते हैं इसलिए भयरहित होकर हम लोग थोड़ी देर विश्राम करें।”