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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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दोनों अपने गन्तव्य की ओर बढ़ने लगे।
इस घटना के कुछ वर्ष बाद विजयनगर अनावृष्टि का शिकार हो गया। बरसात के मौसम
में भी आसमान में बादलों के दर्शन दुर्लभ हो गए। सूर्य की सीधी किरणों से धरती में दरारें
पड़ने लगीं। विजयनगर की प्रजा त्राहि-त्राहि करने लगी। मवेशियों के लिए चारे का अभाव
हो गया। चारा नहीं मिलने के कारण मवेशी मरने लगे।
पूर्व में विजयनगर की ऐसी हालत कभी हुई हो, ऐसा महाराज की स्मृति में नहीं था।
उन्होंने एक दिन तेनाली राम से प्रजा का दुख-सुख जानने के लिए विजयनगर भ्रमण का
कार्यक्रम तैयार करने के लिए कहा।
तेनाली राम ने महाराज के खुफिया विभाग से विजयनगर के ऐसे इलाकों का नक्शा
तैयार करवा लिया जहाँ अनावृष्टि के कारण भुखमरी की नौबत आ चुकी थी। किसान
पलायन करने को बाध्य हो गए थे। मवेशी मर रहे थे।
नक्शा मिल जाने पर तेनाली राम ने गाँवों की प्राथमिकताएँ तय कीं कि कहाँ पहले जाना
चाहिए और कहाँ बाद में। फिर महाराज और तेनाली राम का विजयनगर भ्रमण का
अभियान शुरू हो गया। महाराज कृष्णदेव राय बहुत सूक्ष्मता से यह जानकारी जुटा रहे थे
कि किस गाँव में कितने किसान रहते हैं और अनावृष्टि के कारण उन्हें कितना नुकसान
उठाना पड़ रहा है।
वैसे राज्य का खुफिया विभाग अपने स्तर पर पूरे राज्य की बदहाली के सम्बन्ध में
महत्त्वपूर्ण तथ्य जुटाने में लगा था और राज्य का सिंचाई विभाग उन सम्भावनाओं की
तलाश में था जिससे अनावृष्टि के बावजूद राज्य में कृषि की पहल की जा सके।
महाराज ने राज्य के अन्न भंडार के द्वार अनावृष्टि के शिकार कृषकों के सहायतार्थ खुलवा
दिए थे। मगर इतना ही काफी नहीं था। इसलिए वे स्वयं गाँवों की वास्तविक स्थिति का
मूल्यांकन करने के लिए निकले थे।
यात्रा आरम्भ करने के एक सप्ताह बाद ही महाराज उस गाँव में थे जहाँ का एक किसान
कभी उनसे बोला था, ‘कृषि उत्पाद उसके श्रम का परिणाम है, ईश्वरीय कृपा का नहीं।’ उस
गाँव में प्रवेश के साथ ही उन्हें वह घटना याद हो आई।
संयोग की बात थी कि तेनाली राम को वह किसान खेत की मेड़ पर बैठा दिख गया।
किसान उदास था और उसके खेत में भी दूर तक कोई फसल नहीं दिख रही थी। उसके पास
पहुँचने के बाद तेनाली राम ने महाराज को रुकने का संकेत किया और खुद उस किसान
के पास पहुँचकर पूछा, ”क्या बात है भाई! बहुत उदास दिख रहे हो?”