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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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उस युवा तपस्वी से मिल आएँ।”
महाराज और तेनाली राम स्वयं चलकर युवा तपस्वी की कुटिया में गए। युवा तपस्वी ने
उन्हें देखकर अपने हाथ जोड़ लिये और कहा, “धन्यभाग्य! हमारे गुरुजन पधारे!’
महाराज विस्मित से रह गए युवक की बात सुनकर। उन्होंने कहा, “प्रभु, यह आप क्या
कह रहे हैं? मैं तो यह समझता हूँ कि अब आप सिद्ध हो चुके हैं इसलिए आपसे दीक्षा लेने
की इच्छा से आपके पास आया था।”
युवक ने गम्भीरता से कहा, “महाराज! आप मेरे आश्रयदाता हैं। पिता तुल्य और
आदरणीय और तेनाली राम मेरे गुरु हैं-उन्होंने मुझे मनन करने की सीख दी थी और मैं
उनके निर्देश पर ही मन में डूब गया। तब मैंने जाना कि संसार में ऐसा कोई नहीं जिसमें
ज्ञान का सागर न हो...चाहने पर कोई भी इस ज्ञान-सागर में गोते लगा सकता है।“ उस
युवक ने तेनाली राम के चरण छुए और तेनाली राम ने उसे अपने गले से लगा लिया।