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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

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(स्वरोदय विज्ञान)

जल और पृथ्वी तत्व तथा दाहिना स्वर चले, तो भी अच्छा फल होता है।

यदि प्रातःकाल सुषुम्ना स्वर चले, तो राजा का नाश हो या कोई दूसरा राजा राज्यारूढ़ हो। देखने वाला एक वर्ष में मर जायें और अकाल या दुर्भिक्ष पड़े।

आकाश तत्व में दुर्भिक्ष हो, वर्षा न हो, प्रजा दुःखी रहे, राज्य में उत्पात हो और घास भी कम हो। अग्नि तत्व में अकाल पड़े, रोगादिक बढ़ें और वर्षा थोड़ी हो। वायु तत्व में नगर में उत्पात हो, वर्षा थोड़ी हो और अकाल पड़े।

यह मालूम करने के लिए कि इस समय कौन दिन का दौरा है — यह मालूम करें कि इस समय कितने घड़ी दिन चढ़ा है। सूर्योदय से ढाई घड़ी तक उसी दिन का दौरा और बाद की २॥ घड़ी तक उसके छठवें दिन का दौरा रहता है। इस तरह के हिसाब से मालूम कर ले कि, इस समय किस दिन का दौरा है।