स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)
Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)
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यात्री शीघ्र ही वापिस आ जायेगा। यदि दोनों का बायाँ स्वर चलता हो तो देर से वापिस आवे। यदि दोनों के स्वर भिन्न-भिन्न हों तो बहुत देर में यात्री वापस आवे। यदि चलते स्वर से आकर बन्द स्वर की ओर बैठ कर प्रश्नकर्ता किसी प्रकार का प्रश्न करे, तो कार्य कदापि न हो संभव है बना बनाया काम भी बिगड़ जाय। यदि प्रश्नकर्ता बन्द स्वर की ओर से आकर चलते स्वर की ओर बैठकर प्रश्न करे तो चाहे उस काम में कौसी भी निराशा हो- वह काम बन जायेगा। यदि उसी समय पृथ्वी या जल तत्त्व चलता हो, तो चाहे कितने भी विघ्न सामने हों, कार्य अवश्य पूरा हो जाय।
सुषुम्णा स्वर में यदि कोई प्रश्न किया जायगा तो वह कभी भी पूरा न हो परन्तु यदि सामने से ठहर कर प्रश्न किया जाय तो उसका फल मध्यम है संभव है कि कार्य हो जाय।
साधारण-फल
यह बात स्वरोदय शास्त्रियों में प्रसिद्ध है जब कोई प्रश्नकर्ता प्रश्न करता है और उस समय यदि दाहिना स्वर चले तो काम बन जाता है; परन्तु यह भूल है, कभी-कभी इससे उत्तर ठीक मिल जाता है, जबकि प्रश्नकर्ता दाहिनी ओर बैठ कर प्रश्न करता है अन्यथा नहीं।
भविष्य-फल
वर्ष फल
चैत्र मास में जब शुक्ल पक्ष आरम्भ हो उस दिन सवेरे यह देखें कि, कौन सा स्वर चल रहा है और कौन सा तत्त्व है। यदि संक्रांति का फल मालूम करना है तो सूर्योदय के समय स्वर और तत्वों का निरीक्षण करे। यदि बायाँ तत्त्व चलता हो और उसमें पृथ्वी तत्त्व भी हो, तो वर्ष अच्छा है, राजा और प्रजा शान्तिपूर्वक रहेंगे; देश की वृद्धि हो, पानी बरसे, कृषि अच्छी रहें और अभ्यासी का भी वर्ष अच्छा जाये।
यदि जल तत्त्व चलता हो तो वर्षा खूब हो, अनाज की उपज अच्छी हो। प्रजा में आनन्द और मंगल रहें।