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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

by श्रीमदप्पय्य दीक्षित

Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)

DevanagariHindipublished590 pages

Page 546 of 590

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Page 546
५१६सिद्धान्तलेशसंग्रहे[ चतुर्थ परिच्छेद

लक्षणानुरोधेनाऽऽत्मरूपाया अप्यविद्यानिवृत्तेः ज्ञानसाध्यत्वाच्च। ज्ञाने
सति अग्रिमक्षणे आत्मरूपाविद्यानिवृत्तिसत्त्वम्, तद्व्यतिरेके तत्प्रतियोग्य-
विद्यारूपस्तदभाव इति उक्तलक्षणसत्त्वात्।

आनन्दबोधाचार्यास्तु युक्तिभिः पञ्चमीं विधाम्।
सदसत्सदसन्मिथ्याभिन्नामात्मनि तां विदुः॥ ६॥

आनन्दबोधाचार्य कहते हैं कि अविद्याकी निवृत्तिका पञ्चम प्रकार ही युक्तियोंसे
सिद्ध होता है अर्थात् अविद्यानिवृत्ति सत्, असत्, सदसत् और अनिर्वचनीयसे
भिन्न ही है ॥ ६ ॥

आत्मान्यैवाऽविद्यानिवृत्तिः। सा च न सती, अद्वैतहानेः। नाऽप्य-
सती, ज्ञानसाध्यत्वायोगात्। नाऽपि सदसद्रूपा, विरोधात्। नाऽप्यनिर्वाच्या,
अनिर्वाच्यस्य सादेरज्ञानोपादानकत्वनियमेन मुक्तावपि तदुपादानाज्ञाना-
नुवृत्त्यापत्तेः, ज्ञाननिवर्त्यत्वापत्तेश्च। किन्तु उक्तप्रकारचतुष्टयोत्तीर्णा
पञ्चमप्रकारेत्यानन्दबोधाचार्याः।

अविद्यानिवृत्ति ज्ञानसाध्य हो सकती है, क्योंकि ज्ञानके होनेपर उससे उत्तर
क्षणमें आत्मरूप अविद्यानिवृत्तिकी सत्ता है और ज्ञानके न रहनेपर अविद्या-
निवृत्तिकी प्रतियोगिभूत जो अविद्या है तद्रूप अभाव है अर्थात् अविद्या-
निवृत्तिका अभाव है, इसलिए 'साध्यत्वका' उक्त लक्षण अविद्यानिवृत्तिमें
घट जाता है।

आत्मासे भिन्न ही अविद्यानिवृत्ति पदार्थ है, और वह अविद्यानिवृत्ति पदार्थ
सत्य नहीं है, क्योंकि उसे सत्य माननेसे अद्वैतकी हानि होगी, और असत्
भी नहीं मान सकते, क्योंकि ऐसा माननेसे उसमें ज्ञानसाध्यत्व नहीं हो सकेगा,
और सत् और असत्रूप भी नहीं मान सकते, क्योंकि सत्त्व और असत्त्वका
विरोध होनेसे एकमें उन विरुद्ध दो धर्मोंका समावेश नहीं हो सकता है।
और अज्ञाननिवृत्तिको अनिर्वचनीय भी नहीं मान सकते हैं, क्योंकि सादि
अनिर्वाचनीय पदार्थोंके प्रति अज्ञान ही उपादानकारण होता है, ऐसा नियम
होनेके कारण मुक्तिमें भी अपने उपादानकारण अविद्याकी अनुवृत्ति प्रसक्त
होगी और मुक्तिमें ज्ञाननिवर्त्यत्वका भी प्रसङ्ग होगा। इसलिए उक्त चार
प्रकारोंसे (सत्, असत्, सदसत् और अनिर्वचनीय इन चार प्रकारोंसे)

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