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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

by श्रीमदप्पय्य दीक्षित

Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)

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DevanagariHindipublished590 pages

Page 132 of 590

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Page 132
१०२सिद्धान्तलेशसंग्रह[ प्रथम परिच्छेद

जीवः । तस्मिन्नवच्छेदकस्य कल्पितत्वेऽपि अवच्छेद्यस्य तस्याऽकल्पितत्वेन ब्रह्मणोऽभिन्नत्वात् । तमावृत्य स्थितायां मायायां कल्पितेऽन्तःकरणे चिदाभासोऽन्तःकरणतादात्म्यापत्त्या 'अहम्' इत्यभिमन्यमानो व्यावहारिकः, तस्य मायिकत्वेऽपि यावद्व्यवहारमनुवृत्तेः । स्वप्ने तमप्यावृत्य स्थितया मायावस्थाभेदरूपया निद्रया कल्पिते स्वप्नदेहादावहमभिमानी प्रातिभासिकः । स्वप्नप्रपञ्चेन सह तद्द्रष्टुर्जीवस्यापि प्रबोधे निवृत्तेरिति । एवमेते प्रतिबिम्बेश्वरवादिनां पक्षभेदा दर्शिताः ।

अविद्यायां चिदाभासो जीवो बिम्बचिदीश्वरः ।
स्वातन्त्र्याद्युपपत्तेरित्याहुर्विवरणानुगाः ॥ ४० ॥

विवरणके अनुसारियोंका कहना है कि अविद्यामें चैतन्य का आभास जीव है और बिम्बस्थानापन्न चैतन्य ईश्वर है, क्योंकि उसमें स्वातन्त्र्य आदिकी उपपत्ति है ॥४०॥

विशेषणीभूत स्थूल और सूक्ष्म शरीरोंके कल्पित होनेपर भी विशेष्यभूत चैतन्यके स्वतः सत्य होनेसे उसका (जीवका) ब्रह्मके साथ अभेद हो सकता है । कूटस्थ आत्माको आवृत करके अविद्याके स्थित होनेपर कूटस्थ आत्मामें कल्पित अन्तःकरणमें—अन्तःकरणके तादात्म्यसे 'अहम्' (मैं) इस प्रकारका अभिमान करनेवाला—चिदाभास व्यावहारिक जीव है। यद्यपि वह मायिक है, तो भी व्यवहारपर्यन्त उसकी अनुवृत्ति होती है। [ कोई लोग शङ्का करते हैं कि व्यावहारिक जीव है ही नहीं, परन्तु यह शङ्का युक्त नहीं है, क्योंकि 'अहं कर्ता भोक्ता' इत्यादि अनुभवसे वह सिद्ध है। कर्तृत्व, भोक्तृत्व आदि धर्म जीवसे अन्यत्र—अन्तःकरणमें नहीं रह सकते, क्योंकि चिदाभासशून्य अन्तःकरणमें चेतनधर्मत्वसे प्रसिद्ध कर्तृत्व आदि नहीं रह सकते । पारमार्थिक जीव भी कर्तृत्वका आश्रय नहीं है, क्योंकि वह कूटस्थ है, यह भाव है ] स्वप्नावस्थामें व्यावहारिक जीवका भी आवरण करके स्थित मायावस्थाविशेष निद्रासे कल्पित स्वप्नके शरीर आदिमें 'अहम्' अभिमान करनेवाला जीव प्रातिभासिक है, क्योंकि जागरणावस्थामें स्वप्नप्रपञ्चके साथ ही साथ स्वप्नद्रष्टा जीवकी भी निवृत्ति होती है । इस प्रकार प्रतिबिम्बको ईश्वर कहनेवालोंके पक्षोंका दिग्दर्शन कराया गया है ।

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