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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 455 of 526

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Page 455

चतुर्थोध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३६९

नियोजयेच्च मतिमान् व्यूहाज्ञानाविधान् सदा ॥ २६७ ॥
इस भाँति से बुद्धिमान सेनापति सदा नाना प्रकार के व्यूहों की रचना में सैनिकों को रक्खे ।

अश्वानां च गजानां च पदातीनां पृथक् पृथक् ।
उच्चैः संश्रावयेद् व्यूहसङ्केतान् सैनिकान्नृपः ॥ २६८ ॥
वामदक्षिणसंस्थो वा मध्यस्थो वाऽग्रसंस्थितः ।
**सैनिकों को संकेतज्ञान कराने का निर्देश—**अश्व, गज तथा पैदल सेना के सैनिकों को पृथक् २ बुलाकर व्यूह-रचना के संकेतों को राजा वाम, दक्षिण, मध्य या अग्र भाग में स्थित होकर भली भांति सुना देवे ।

श्रुत्वा तान् सैनिकैः कार्यमनुशिष्टं यथा तथा ॥ २६९ ॥
**संकेतों के अनुसार सैनिकों को कार्य करने का निर्देश—**उन संकेतों को सुनकर जैसी आज्ञा हो उसके अनुसार सैनिकों को वैसा ही करना चाहिये ।

सम्मीलनं प्रसरणं परिभ्रमणमेव च ।
आकुञ्चनं तथा यानं प्रयाणमपयानकम् ॥ २७० ॥
पर्यायेण च सांमुख्यं समुत्थानं च लुण्ठनम् ।
संस्थानं चाष्टदलवच्चक्रवद् गोलतुल्यकम् ॥ २७१ ॥
**संकेतानुसार स्थिति रखने का निर्देश—**जैसे आज्ञानुसार कभी संमिलित हो जाना, फैल जाना, चारो ओर घूम जाना, सिकुड़ जाना, धीरे २ गमन करना, जल्दी २ चलना, पीछे हट जाना, पर्याय से संमुख हो जाना, खड़े हो जाना, लोटना, अष्टदल कमल की भांति पङ्क्ति बांध कर खड़ा होना, या चक्र भांति गोलाकार में खड़ा होना सैनिकों को ये सब करना चाहिये ।

सूचीतुल्यं शकटवदर्धचन्द्रसमं तु वा ।
पृथग् भवनमल्पल्पैः पर्यायैः पङ्क्तिवेशनम् ॥ २७२ ॥
शस्त्रास्त्रयोर्धारणं च सन्धानं लक्ष्यभेदनम् ।
मोक्षणं च तथाऽस्त्राणां शस्त्राणां परिघातनम् ॥ २७३ ॥
और कभी सूची, शकट या अर्धचन्द्र के आकार का व्यूह बनाकर खड़ा रहना, पर्याय से थोडी २ सेना का अलग २ हो जाना या पंक्ति बांधकर बैठ जाना, शस्त्र तथा अस्त्रों का धारण करना, संधान करना और लक्ष्य का भेदन करना, अस्त्रों का छोड़ना, शस्त्रों का प्रहार करना, इन सबों को संकेतानुसार करना चाहिये ।

द्राक् सन्धानं पुनः पातो ग्रहो मोक्षः पुनःपुनः ।
स्वगूह्नं प्रतीघातः शस्त्रास्त्रपदविक्रमः ॥ २७४ ॥
**संकेतानुसार बाणादि चलाने आदि का निर्देश—**संकेतानुसार बाणादि को

२४ शु०