Skip to content
SarvaKosh
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 438 of 526

Read in context
Page 438

३५२ | शुक्रनीतिः

प्रोथे सुवलयस्तिस्रः पूर्णायुर्यस्य वाजिनः ॥ १६३ ॥
यथा यथा तु हीनास्ता हीनमायुस्तथा तथा ।

निन्दित घोड़ों के लक्षण—जिस घोड़े के प्रोथ (मुखाग्र) में स्पष्ट ३ बली पड़ी हुई हों उसकी आयु पूर्ण (वृद्धि पूर्ण) हुई समझनी चाहिये। और जैसे २ उक्त बलियों में कमी होती जाती है वैसे २ उसकी आयु क्षीण हुई समझनी चाहिये।

जानूत्पाता त्वोष्ठवायो धूतपृष्ठो जलासनः ॥ १६४ ॥
गतिमध्यासनः पृष्ठपाती पश्चाद्गमोर्ध्वपात् ।
सर्पजिह्वश्शङ्खकान्ति-भीरुरश्वोऽतिनिन्दितः ॥ १६५ ॥
सच्छिद्रभालतिलकी निन्य आश्रयकृत्तथा ।

जो घोड़ा जानुओं को उछालता हो, ओठों को बजाता हो, पीठ हिलाता हो, जल में या चलते २ बैठ जाता हो, पीठ पर से सवार को गिरा देता हो, पीछे की ओर घसकता हो, पैर ऊपर उठाता हो, सांप की तरह जीभ लपलपानेवाला, शंख की भांति कान्तिवाला, और भड़कनेवाला हो वह अत्यन्त निन्द्य होता है। और जिस घोड़े के भाल में छिद्रयुक्त तिलक हो वह निन्दनीय तथा आश्रयदाता स्वामी को नष्ट करनेवाला होता है।

वृषस्याष्टौ सिता दन्ताश्चतुर्थेऽब्देऽखिलाः स्मृताः ॥ १६६ ॥
द्वावन्त्यौ पतितोत्पन्नौ पञ्चमेऽब्दे हि तस्य व ।

दाँतों द्वारा बैल व ऊंट के आयु की परीक्षा—बैल के चौथे वर्ष तक में सम्पूर्ण सफेद ८ दांत निकल आते हैं, और ५ वें वर्ष में अन्त के दो दांत गिर कर पुनः उत्पन्न जाते हैं।

षष्ठे तूपान्त्यौ भवतः सप्तमे तत्समीपगौ ॥ १६७ ॥
अष्टमे पतितोत्पन्नौ मध्यमौ दशनौ खलु ।

६ ठें वर्ष में अन्त के समीप में स्थित दो दांत, ७ वें वर्ष में उसके समीप के दो दांत, और ८ वें वर्ष में मध्य के दो दांत क्रमसे गिरकर पुनः उत्पन्न हो जाते हैं।

कृष्णपीतसितारक्तशङ्खच्छायौ द्विके द्विके ॥ १६८ ॥
क्रमादब्दे च भवतश्चलनं पतनं ततः ।
उष्ट्रस्योक्तप्रकारेण वयोग्ज्ञानं तु वा भवेत् ॥ १६९ ॥

उसके बाद ८ वें वर्ष से दो-दो वर्ष के पश्चात् क्रम से दो-दो दांत काले पीले, श्वेत, रक्त तथा शंख वर्ण के हो जाते हैं। उसके बाद वे हिलने लगते हैं और अन्त में गिर जाते हैं। और इसी प्रकार से ऊंटकी अवस्था का भी ज्ञान किया जाता है।