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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 439 of 526

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Page 439
चतुर्थाध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम्३५५

प्रेरकाऽऽकर्षकमुखोऽङ्कुशो गजविनिग्रहे ।
हस्तिपकैर्गजस्तेन विनेयः सुगमाय हि ॥ १७० ॥

**अंकुश के लक्षण—**गज को दमन करने के लिये अंकुश (गजबाग) का स्वरूप प्रेरणा करने के लिये नुकीला तथा उसी के साथ लगा हुआ खींचने के लिये झुका हुआ बनाना चाहिये । और इसी के द्वारा मार कर फीलवान अच्छी तरह से चलने की शिक्षा हाथी को दे ।

खलीनस्योर्ध्वखण्डौ द्वौ पार्श्वगौ द्वादशाङ्गुलौ ।
तत्पार्श्वान्तर्गताभ्यां तु सुदृढाभ्यां तथैव च ॥ १७१ ॥
वारकाकर्षखण्डाभ्यां रज्ज्वर्थवलयैर्युतौ ।
एवंविधखलीनेन वशीकुर्यात्तु वाजिनम् ॥ १७२ ॥

**घोड़ों की लगाम का वर्णन—**लगाम के ऊपर दो खण्ड होते हैं जो लोहे के बने होते हैं और मुख के दोनों पार्श्व तक होते हैं एवं १२ अंगुल के होते हैं। उन्हीं पार्श्वों के अन्तर्गत अत्यन्त दृढ़ निवारण एवं आकर्षण (खींचने) के लिये दो खण्ड होते हैं एवं उनमें रज्जु (डोरी) बांधने के लिये कड़े बने रहते हैं जिन्हें आवश्यकतानुसार सवार हाथ में लिये हुये खींचता रहता है । इस प्रकार के लगाम से घोड़े को अपने वश में करना चाहिये ।

नासिकाकर्षरज्ज्वा तु वृषोष्ट्रं विनयेद् भृशम् ।
तीक्ष्णाग्रियः सप्तफालः स्यादेषां मलशोधने ॥ १७३ ॥

**बैल व ऊँट को वश में करने का उपाय तथा उनके मल-शोधनार्थ दंताली का वर्णन—**और नासिका में खींचने के लिये लगी हुई रस्सी से बैल तथा ऊँट को अपने वश में करना चाहिये । और इन सबों के मल (लीद-गोबर आदि) हटाने के लिये जो कुदारी होती है उसका अग्रभाग तीक्ष्ण होता है तथा सात फाल का होता है ।

सुताडनैर्विनेया हि मनुष्याः पशवः सदा ।
सैनिकास्तु विशेषेण न ते वै धनदण्डतः ॥ १७४ ॥

**मनुष्य और पशुओं का ताडन द्वारा वश में करने का एवं सैनिकों को धन-दण्ड से दण्डित न करने का निर्देश—**मनुष्य और पशु इनको सदा भलीभांति ताड़ना देकर ठीक रास्ते पर लाना चाहिये । और सैनिकों को तो विशेष रूप से ताडन का दण्ड देना चाहिये । उन्हें धन-दंड से दण्डित नहीं करना चाहिये ।

अनूपे तु वृषाश्वानां गजोष्ट्राणां तु जाङ्गले ।
साधारणे पदातीनां निवेशाद्रक्षणं भवेत् ॥ १७५ ॥

**बैल आदिकों के निवास का सुरक्षित स्थल—**अनूप (जलप्राय) देश में

२३ शु०