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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 437 of 526

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Page 437

चतुर्थाध्याये सेनानिरूपणप्रकरणम् ३५१

**घोड़ा, बैल तथा ऊँट की आयु तथा अवस्थाओं का प्रमाण—**घोड़े की परमायु ३४ वर्ष तक की मानी गई है। और बैल तथा ऊंटों की परमायु २५ वर्ष तक की ही मानी जाती है। घोड़ा, बैल तथा ऊंट की बाल्यावस्था ५ वर्ष तक की और मध्यावस्था १६ वर्ष तक की होती है उसके बाद वृद्धावस्था मानी गई है।

दन्तानामुद्गमैर्वर्णैरायुर्ज्ञेयं वृषाश्वयोः ॥ १५७ ॥
**दांतों के द्वारा बैल व घोड़ों की अवस्था-ज्ञान का निर्देश—**बैल तथा घोड़े की अवस्था का ज्ञान उनके दांत निकलने तथा दांतों के वर्ण के द्वारा किया जाता है।

अश्वस्य षट् सिता दन्ताः प्रथमाब्दे भवन्ति हि ।
कृष्णलोहितवर्णास्तु द्वितीयेऽब्दे ह्यधोगताः ॥ १५८ ॥
**दांतों द्वारा घोड़ों के प्रथम वर्ष का ज्ञान—**घोड़ों के प्रथम वर्ष में उपरी भाग में सफेद ६ दांत होते हैं। और दूसरे वर्ष में काले तथा लाल मिश्रित वर्ण के ६ दांत नीचे भाग में निकलते हैं।

तृतीयेऽब्दे तु सन्दंशौ क्रमात् कृष्णौ षडब्दतः ।
तत्पार्श्ववर्त्तिनौ तौ तु चतुर्थे पुनरुद्गतौ ॥ १५९ ॥
तीसरे वर्ष में दो २ दांत ६ वर्ष तक क्रम से कृष्ण वर्ण के हो जाते हैं और चौथे वर्ष में पुनः उक्त दाँतों के पार्श्व में दो दांत निकल आते हैं।

अन्त्यौ द्वौ पञ्चमाब्दे तु संदंशौ पुनरुद्गतौ ।
मध्यपार्श्वान्तगौ द्वौ द्वौ क्रमात् कृष्णौ षडब्दतः ॥ १६० ॥
पांचवें वर्ष में अन्त में दो दांत फिर निकल आते हैं। मध्य तथा पार्श्व के अन्त भाग में दो २ दांत ६ वर्ष में क्रम से कृष्ण वर्ण के हो जाते हैं।

नवमाब्दात् क्रमात् पीतौ तौ सितौ द्वादशाब्दतः ।
दशपञ्चाब्दतस्तौ तु काचाभौ क्रमशः स्मृतौ ॥ १६१ ॥
नवें वर्ष से वे दोनों दांत क्रम से पीत वर्ण के तदनन्तर फिर १२ वें वर्ष तक में सफेद हो जाते हैं। फिर १५ वें वर्ष तक वे दोनों कांच की भांति क्रमशः उज्ज्वल हो जाते हैं।

अष्टादशाब्दतस्तौ हि मध्वाभौ भवतः क्रमात् ।
शङ्खाभौ चैकविंशाब्दाच्चतुर्विंशाब्दतः सदा ॥ १६२ ॥
छिद्रं सञ्चलनं पातो दन्तानां च त्रिके त्रिके ।
फिर १८ वें वर्ष तक वे दोनों मधु के समान वर्ण के क्रम से हो जाते हैं। फिर २१ वें वर्ष तक शङ्ख के समान वर्ण के हो जाते हैं पुनः २४ वें वर्ष तक तीन ३ दांतों में छिद्र, संचलन (हिलना) तथा गिरना जारी हो जाता है।