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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 436 of 526

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Page 436

३५० | शुक्रनीतिः

परिणाहो वृषमुखादुदरे तु चतुर्गुणः।
सककुत् त्रिगुणोच्छ्रन्तु सार्धत्रिगुणदीर्घता ॥ १५० ॥
**बैल के मुखादि का प्रमाण—**वृष के मुख के प्रमाण से चौगुना उदर का विस्तार और ककुद् (बैल के पीठ पर का टिल्ला)-के सहित उदर मुख से तिगुना ऊंचा एवं मुख से उदर की लम्बान साढ़े तीन गुना होना चाहिये।

सप्ततालो वृषः पूज्यो गुणैरेभियुतो यदि।
**पूज्य सप्तताल बैल के लक्षण—**जो सात ताल प्रमाण ऊंचा होते हुये यदि इन निम्न लिखित गुणों से युक्त हो तो वह बैल पूजनीय (श्रेष्ठ) माना जाता है।

न स्थायी न च वै मन्दः सुवोढा स्वङ्गसुन्दरः ॥ १५१ ॥
नातिक्रूरः सुपृष्ठश्च वृषभः श्रेष्ठ उच्यते।
**श्रेष्ठ बैल के लक्षण—**जो चलते १ रुकनेवाला (अड़ियल) न हो और धीरे २ चलनेवाला भी न हो एवं सुन्दर वहन करनेवाला, सभी अङ्गों से सुन्दर, अत्यन्त क्रूर (बदमाश) न हो और जिसकी पीठ सुन्दर हो, ऐसा बैल श्रेष्ठ कहा जाता है।

त्रिंशद्योजनगन्ता वा प्रत्यहं भारवाहकः ॥ १५२ ॥
नवतालश्च सुदृढः सुमुखोष्ट्रः प्रशस्यते।
**श्रेष्ठ ऊंट के लक्षण—**जो प्रतिदिन ३० योजन (१२० कोश) तक चल सकनेवाला या भारवहन करनेवाला, नवताल-प्रमाण ऊंचा हो, एवं अत्यन्त मजबूत शरीरवाला तथा सुन्दर मुखवाला हो, ऐसा ऊंट प्रशस्त माना जाता है।

शतमायुर्मनुष्याणां गजानां परमं स्मृतम् ॥ १५३ ॥
मनुष्यगजयोर्बाल्यं यावद्विंशतिवत्सरम् ।
नृणां हि मध्यमं यावत् षष्टिवर्षे वयः स्मृतम् ॥ १५४ ॥
अशीतिवत्सरं यावद् गजस्य मध्यमं वयः।
**मनुष्य और हाथियों की आयु तथा बाल्यादि अवस्था का प्रमाण—**मनुष्यों और हाथियों की परम आयु १०० वर्ष तक की और बाल्यावस्था २० वर्ष तक की मानी गई है। और मनुष्यों की मध्यम (जवानी से प्रौढ़ावस्था तक) अवस्था ६० वर्ष तक की मानी जाती है किन्तु हाथियों की मध्यम अवस्था ८० वर्ष तक की मानी गई है।

चतुस्त्रिंशत्तु वर्षाणामश्वस्यायुः परं स्मृतम् ॥ १५५ ॥
पञ्चविंशतिवर्षं हि परमायुर्वृषोष्ट्रयोः ।
बाल्यमश्ववृषोष्ट्राणां पञ्चमं वत्सरं मतम् ॥ १५६ ॥
मध्यं यावत् षोडशाब्दं वार्धक्यं तु ततः परम्।