Skip to content
SarvaKosh
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished526 pages

Page 274 of 526

Read in context
Page 274

१८८ | शुक्रनीतिः

**प्रजाओं के साथ दण्ड तथा भेद के प्रयोग से राज्य-नाशका निर्देश—**अपनो प्रजाओं का दण्ड तथा भेद से पालन करने से राज्य का विनाश हो जाता है। अतः जिस प्रकार से प्रजायें क्षीण-बल और प्रबल न हों किन्तु समबल में रहें उसी प्रकार से उनका पालन करना चाहिये।

निवृत्तिरसदाचाराद्दमनं दण्डतश्च तत् ।
येन संदम्यते जन्तुरुपायो दण्ड एव सः ॥ ४३ ॥

**दण्ड के लक्षण—**दण्ड के द्वारा असत् ( बुरे ) आचरण से निवृत्ति और दमन होता है अतः जिस उपाय से मनुष्य का अच्छी तरह से दमन होता है उसे ‘दण्ड’ कहते हैं।

स उपायो नृपाधीनः स सर्वस्य प्रभूर्यतः ।

वह दण्ड नामक उपाय राजा के अधीन रहता है क्योंकि वही सर्वो का स्वामी है ( अतः दण्ड वही दे सकता है ) ।

निर्भर्त्सनं चापमानोऽनशनं बन्धनं तथा ॥ ४४ ॥
ताडनं द्रव्यहरणं पुरान्निर्वासनाङ्कने ।
व्यस्तक्षौरमसस्थानमङ्गच्छेदो वधस्तथा ॥ ४५ ॥
युद्धमेते ह्युपायाश्च दण्डस्यैव प्रभेदकाः ।

**दण्ड के भेद का निर्देश—**झिड़कना, अपमान ( सम्मान पद से अलग कर देना ), उपवास कराना, बांधना, मारना, धन हर लेना, शहर या राज्य से निकाल देना, दाग देना, बुरे ढङ्ग से सिर मुड़वा देना, गदहे आदि पर चढ़ा देना, किसी अङ्ग ( नाक-कान आदि ) को कटवा देना, प्राणदण्ड देना, युद्ध करना, ये सभी उपाय दण्ड के ही भेद माने जाते हैं।

जायते धर्मनिरताः प्रजा दण्डभयेन च ॥ ४६ ॥
करोत्याधर्षणं नैव तथा चासत्यभाषणम् ।
क्रूराश्च मार्दवं यान्ति दुष्टा दौष्ट्यं त्यजन्ति च ॥ ४७ ॥
पशवोऽपि वशं यान्ति विद्रवन्ति च दस्यवः ।
पिशुना मूकतां यान्ति भयं यान्त्याततायिनः ॥ ४८ ॥
करदाश्च भवन्त्यन्ये वित्रासं यान्ति चापरे ।
अतो दण्डधरो नित्यं स्यान्नृपो धर्मरक्षणे ॥ ४९ ॥

**दण्ड के प्रभाव एवं राजा को धर्मरक्षार्थ दण्डधर होने का निर्देश—**दण्ड के भय से प्रजा अपने २ धर्मों में रत रहती है । और वह किसी दुर्बल पर आक्रमण तथा असत्य-भाषण नहीं करती है। क्रूर लोग कोमलता को धारण कर लेते हैं, दुष्ट लोग दुष्टता को छोड़ देते हैं, पशु भी वश में हो जाते हैं, डाकू लोग भाग जाते हैं, चुगलखोर जबान बन्द कर लेते हैं, आततायी लोग डर