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सर्वकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 1782, कुल 2621 में से

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पृष्ठ 1782

२१ ॥

‘धर्मात्मा और पराक्रमी सुषेण धर्मका पुत्र है। राजन्! दधिमुख नामक सौम्य वानर चन्द्रमाका बेटा है॥ २२ ॥

‘सुमुख, दुर्मुख और वेगदर्शी नामक वानर—ये मृत्युके पुत्र हैं। निश्चय ही स्वयम्भू ब्रह्माने मृत्युकी ही इन वानरोंके रूपमें सृष्टि की है॥ २३ ॥

‘स्वयं सेनापति नील अग्निका पुत्र है। सुविख्यात वीर हनुमान् वायुका बेटा है॥ २४ ॥

‘बलवान् एवं दुर्जय वीर अङ्गद इन्द्रका नाती है। वह अभी नौजवान है। बलवान् वानर मैन्द और द्विविद—ये दोनों अश्विनीकुमारोंके पुत्र हैं॥ २५ ॥

‘गज, गवाक्ष, गवय, शरभ और गन्धमादन—ये पाँच यमराजके पुत्र हैं और काल एवं अन्तकके समान पराक्रमी हैं॥ २६ ॥

‘इस प्रकार देवताओंसे उत्पन्न हुए तेजस्वी शूरवीर वानरोंकी संख्या दस करोड़ है। वे सब-के-सब युद्धकी इच्छा रखनेवाले हैं। इनके अतिरिक्त जो शेष वानर हैं, उनके विषयमें मैं कुछ नहीं कह सकता; क्योंकि उनकी गणना असम्भव है॥ २७ ॥

‘दशरथनन्दन श्रीरामका श्रीविग्रह सिंहके समान सुगठित है। इनकी युवावस्था है। इन्होंने अकेले ही खर-दूषण और त्रिशिराका संहार किया था॥ २८ ॥

‘इस भूमण्डलमें श्रीरामचन्द्रजीके समान पराक्रमी वीर दूसरा कोर्इ नहीं है। इन्होंने ही विराधका और कालके समान विकराल कबन्धका भी वध किया था॥

‘इस भूतलपर कोर्इ भी मनुष्य ऐसा नहीं है, जो श्रीरामके गुणोंका पूर्णरूपसे वर्णन कर सके। श्रीरामने ही जनस्थानमें उतने राक्षसोंका संहार किया था॥ ३० ॥

‘धर्मात्मा लक्ष्मण भी श्रेष्ठ गजराजके समान पराक्रमी हैं, उनके बाणोंका निशाना बन जानेपर देवराज इन्द्र भी जीवित नहीं रह सकते॥ ३१ ॥

‘इनके सिवा उस सेनामें श्वेत और ज्योतिर्मुख— ये दो वानर भगवान् सूर्यके औरस पुत्र हैं। हेमकूट नामका वानर वरुणका पुत्र बताया जाता है॥ ३२ ॥

‘वानरशिरोमणि वीरवर नल विश्वकर्माके पुत्र हैं। वेगशाली और पराक्रमी दुर्धर वसु देवताका पुत्र है॥