शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
पृष्ठ 20, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ शालिहोत्र प्रारम्भः
मंगलाचरणम् ।
❁ दोहा ❁
परब्रह्मको ध्यान करि, सब देवन सिर नाय ॥
शालिहोत्र वर्णन करूं, भाषा ललित बनाय ॥
प्रिय सजनो! परमात्मा ने अपनी सृष्टि में एक अद्भुत पशु जिसे
घोडा कहते हैं और वह बग्घी इक्का टमटम आदि सवारियों में
जोते जाते हैं इस घोडेसे संसार के अनेकों कार्य सिद्ध होते हैं
जैसे घोडेपर व्यापारी लोग नाज लादते हैं, यह सवारीके लिये
बहुत ही लाभदायक है घोडा चलने में तेज होताहै कहीं २ के
घोडे ऐसे वीर होते हैं जो अपने स्वामी का विपत्ति समय में
बडा काम करते हैं जैसे दरिया के अत्यन्त वेग में पार जाना कठिन
हो जाता है परन्तु घोडा ऐसा बहादुर होता है, जो मालिक को
पीठपर चढाकर पारकर देता है यहां तक कि यह चोर बदमाशों
से समय पड जानेपर बचा सक्ता हैक्योंकि घोडेकी दौडमें पकड-
ना मुश्किल हो जाता है इसलिये राजा महाराजा अमीर साहू-
कार आदि घोडेकी बड़ी कदर करते हैं किसी समय घोडा बी-
मार होजाता है तो बिना दवा के रोग से प्रायः मर जाते हैं इस
लिये इस पुस्तक में उनके लक्षण शुभ अशुभका वर्णन करके उ-
नकी चिकित्सा भलीभांति लिखी गई है जिससे घोडे सहज में