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सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य

DevanagariHindipublished415 pages

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Page 53

सौन्दर्य लहरी १३
मे शुध्यन्तां ज्योतिरहं विरजा विपाप्मा
भूयासं स्वाहा ।
४ शिरः पाणिपाद पार्श्वपृष्ठोरुदर
जङ्घ शिश्नोपस्थ पायवो ” ”
५ उत्तिष्ट पुरुष हरित पिङ्ग—
लोहिताक्ष देहिर ददापयिता ” ”
६ पृथिव्यापस्तेजो वायुगकाशाः ” ’
७ शब्द स्पर्श रूप रस गन्धा ’ ”
८ मनोवाक् काय कर्माणि ” ”
९ अव्यक्त भावैरहंकारै ज्योतिरहं इत्यादि ”
१० आत्मा ” ”
११ अन्तरात्मा ” ”
१२ परमात्मा ” ”
१३ अन्नमय प्राणमय मनोमय
विज्ञानमयमानन्दमयमात्मा ” ”
प्राणायाम द्वारा भी भूत शुद्धि की जाती है । परन्तु वह भी
भावनाप्रधान ही है । उसकी विधि इस प्रकार है:—
१. पिंगला से पूरक करे और हँ बीज के जप सहित यह भावना
करे कि मूलाधार से जीवात्मा को सुषुम्ना पथ द्वारा ब्रह्मरंध्र में
ले जाकर उसका परम शिव से योग कर रहा हूं, फिर कुम्भक
करके ईडा से रेचक कर दे ।
२. ईडा से पूरक करके यं बीज के जप सहित यह भावना
करे कि शरीर सूख गया है और पिंगला से रेचक कर दे ।