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सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sankhya Darshana with Hindi Commentary

by महर्षि कपिल

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished81 pages

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( ५२ ) हिन्दी सांख्य दर्शन
आसुरिने अपने पञ्चशिख नाम शिष्यको दिया, और उस
पञ्चशिखने इस शास्त्र को बहुत विस्तृत किया तथा प्रचार
किया ॥ ७० ॥
शिष्यपरम्परयाऽऽगत मीश्वरकृष्णेनचैतदार्याभिः।
संक्षिप्तमार्यमतिना सम्यग् विज्ञाय सिद्धान्तम् ।७१।
इसी प्रकार शिष्य परम्परा से आये हुये इस शास्त्र को
आर्यमति (श्रेष्ठबुद्धि ईश्वरकृष्ण ने समीचीन या उत्तम प्रकार
से सिद्धान्त को जान कर आर्या छन्दोंमें संक्षेपसे कहा ॥७१॥
सप्तत्यां किल येऽर्थास्तेऽर्थाः कृत्स्नस्य षष्टितन्त्रस्य ।
आख्यायिकाविरहिताः परिवादविवर्जिताश्चापि॥७२
जो अर्थ ७० आर्या छन्दोंमें कहे गये हैं वेही अर्थ सम्पूर्ण
षष्टितन्त्र या ६० पदार्थों के प्रतिपादक सांख्यशास्त्र के हैं। क्यों
कि-इसमें आख्यायिकाएं और दूसरे शास्त्रों के वाद छोड़दिये
गये हैं ॥७२॥
इति हिन्दीसांख्य दर्शनम्