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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 980 of 1855

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Page 980

अरुषस्य दुहितरा विरूपे स्तृभिरन्या पिपिशे सूरो अन्या.
मिथस्तुरा विचरन्ती पावके मन्म श्रुतं नक्षत ऋच्यमाने.. (३)
चमकते हुए सूर्य की रात-दिनरूपी दो विपरीत रूपवाली कन्याएं हैं. उन में एक तारों से
सुशोभित है और दूसरी सूर्य से. एक दूसरी का विरोध करके घूमती हुई एवं पवित्र करने वाली
रात-दिन की जोड़ी हमारी स्तुतियां सुनकर प्रसन्न हों. (३)
प्र वायुमच्छा बृहती मनीषा बृहद्रयिं विश्ववारं रथप्राम्.
द्युतद्यामा नियुतः पत्यमानः कविः कविमियक्षसि प्रयज्यो.. (४)
हमारी महान् स्तुति महान् धन के स्वामी, सबके आदरणीय एवं अपने रथ को पूर्ण करने
वाले वायु के सामने उपस्थित हो. हे अतिशय यज्ञपात्र, दीप्तिसंपन्न रथ वाले, रथ में जुते हुए
घोड़ों को वश में रखने वाले एवं दूरदर्शी वायु! तुम मेधावी स्तोता की धन से पूजा करो. (४)
स मे वपुश्छदयदश्विनोर्यो रथो विरुक्मान्मनसा युजानः.
येन नरा नासत्येषयध्यै वर्तियाथस्तनयाय त्मने च.. (५)
अश्विनीकुमारों का वह रथ मेरे शरीर को अपने तेज से ढक ले, जो विशेष तेजस्वी है
एवं सोचने मात्र से जिस में घोड़े जुड़ जाते हैं. हे नेता अश्विनीकुमारो! उसी रथ के द्वारा तुम
स्तोता एवं उसके पुत्र-पौत्रों की अभिलाषा पूर्ण करने जाओ. (५)
पर्जन्यवाता वृषभा पृथिव्याः पुरीषाणि जिन्वतम्प्यानि.
सत्यश्रुतः कवयो यस्य गीर्भिर्जगतः स्थातर्जगदा कृणुध्वम्.. (६)
हे वर्षिकारक पर्जन्य एवं वायु! आकाश से प्राप्त करने योग्य एवं पूरक जल बरसाओ.
हे स्तोत्र सुनने वाले एवं मेधावी मरुतो! तुम जिसके स्तोत्र सुनकर प्रसन्न बनो, उसको
धनसंपन्न करना. (६)
पावीरवी कन्या चित्रायुः सरस्वती वीरपत्नी धियं धात्.
ग्नाभिरच्छिद्रं शरणं सजोषा दुराधर्षं गृणते शर्म यंसत्.. (७)
पवित्र बनाने वाली, विचित्र रूपवाली, विचित्र गतिवाली एवं वीर-पत्नी सरस्वती हमारे
यज्ञरूप कर्म को पूरा करे. वह देवपत्नियों के साथ प्रसन्न होकर स्तोता को दोषरहित तथा
ठंड एवं हवा की गति से रहित घर एवं सुख दे. (७)
पथस्पथः परिपतिं वचस्या कामेन कृतो अभ्यानळर्कम्.
स नो रासच्छुरुधश्चन्द्राग्रा धियंधियं सीषधाति प्र पूषा.. (८)
अभिलषित फल पाकर वश में होने वाला स्तोता सभी मार्गों के स्वामी एवं पूजनीय सूर्य
के सामने स्तुतियों सहित उपस्थित हो. पूषा हमें सोने के सींग वाली गाएं दें एवं हमारे सभी
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