ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 860 of 1855
Read in contextक्षोदन्त आपो रिणते वनान्यवोस्त्रियो वृषभः क्रन्दतु द्यौः.. (६)
हे मरुतो! जब तुम बुंदकियों वाली घोड़ियों द्वारा खींचे जाने वाले एवं मजबूत पहियों
वाले रथ पर बैठकर आते हो, तब जल बरसता है, वनों के वृक्ष टूट जाते हैं, सूर्यकिरणों द्वारा
निर्मित एवं बरसने वाला बादल नीचे की ओर मुंह करके गरजता है. (६)
प्रथिष्ट यामन्पृथिवी चिदेषां भर्तेव गर्भं स्वमिच्छवो धुः.
वातान्ह्याश्वान्धुर्यायुयुज्रे वर्षं स्वेदं चक्रिरे रुद्रियासः.. (७)
मरुतों के आने से धरती उपजाऊ बनती है. जिस प्रकार पति पत्नी में गर्भ धारण करता
है, उसी प्रकार मरुद्गण धरती में अपना गर्भ रखते हैं. रुद्रपुत्र मरुत् तेज चलने वाले घोड़ों को
अपने रथ के जुए में जोड़कर वर्षारूपी पसीना उत्पन्न करते हैं. (७)
हये नरो मरुतो मृळता नस्तुवीमघासो अमृता ऋतज्ञाः.
सत्यश्रुतः कवयो युवानो बृहद् गिरयो बृहदुक्षमाणाः.. (८)
हे नेता, असीमित धन के स्वामी, मरणरहित, जल बरसाने वाले, सत्य के कारण
प्रसिद्ध, मेधावी एवं तरुण मरुतो! तुम बहुत सी स्तुतियों के विषय एवं अधिक वर्षा करने
वाले हो. (८)
सूक्त—५९ देवता—मरुद्गण
प्र वः स्पळक्रन्त्सुविताय दावनेऽर्चा दिवे प्र पृथिव्या ऋतं भरे.
उक्षन्ते अश्वान्तरुषन्त आ रजोऽनु स्वं भानुं श्रथयन्ते अर्णवैः.. (१)
हे मरुतो! हव्यदाता तुम्हें हव्य प्राप्त कराने के लिए भली-भांति से स्तुति करते हैं. हे
होता! तुम स्वर्ग की पूजा करो एवं धरती की स्तुतियां बोलो. मरुद्गण दूर-दूर तक पानी
बरसाते हैं, आकाश में सर्वत्र घूमते हैं एवं बादलों के साथ अपना तेज विस्तृत करते हैं. (१)
अमादेषां भियसा भूमिरेजति नौर्न पूर्णा क्षरति व्यथिर्यती.
दूरेदृशो ये चितयन्त एमभिरन्तर्महे विदथे येतिरे नरः.. (२)
मरुतों के भय से धरती इस तरह कांपती है, जिस प्रकार सवारियों से भरी हुई नाव
हिलती हुई चलती है. मरुद्गण दूर दिखाई देने पर भी अपनी गति के कारण मालूम हो जाते
हैं. नेता मरुद्गण धरती-आकाश के बीच में रहकर अधिक हव्य पाने का यत्न करते हैं. (२)
गवामिव श्रियसे शृङ्गमूत्तमं सूर्यो न चक्षू रजसो विसर्जने.
अत्या इव सुभ्व१श्चारवः स्थान मर्या इव श्रियसे चेतथा नरः.. (३)
हे मरुतो! जिस प्रकार गाय के सिर पर उत्तम सींग होते हैं, उसी प्रकार तुम शोभा के
ebook converter DEMO Watermarks*