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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1812 of 1855

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Page 1812

उन्मदिता मौनेयेन वाताँ आ तस्थिमा वयम्.
शरीरेदस्माकं यूयं मर्तासो अभि पश्यथ.. (३)
हम सब लोक का व्यवहार त्यागकर मतवाले हो गए हैं और वायु के ऊपर स्थित हैं. हे
मनुष्यो! तुम हमारा शरीर ही देख पाते हो. (३)
अन्तरिक्षेण पतति विश्वा रूपावचाकशत्.
मुनिर्देवस्य देवस्य सौकृत्याय सखा हितः.. (४)
मुनि आकाश में उड़ते हैं एवं सारे रूपों को देखते हैं. देवों के प्रियमित्र मुनि उत्तम कार्य
करने के लिए ही जीते हैं. (४)
वातस्याश्वो वायोः सखाथो देवेषितो मुनिः.
उभौ समुद्रावा क्षेति यश्च पूर्व उतापरः.. (५)
मुनि वायु का भोजन करने वाले, वायु के मित्र एवं देवों द्वारा अभिलषित हैं. वे पूर्व और
पश्चिम दोनों सागरों में निवास करते हैं. (५)
अप्सरसां गन्धर्वाणां मृगाणां चरणे चरन्.
केशी केतस्य विद्वान्सखा स्वादुर्मदिन्तमः.. (६)
केशी अप्सराओं व गंधर्वों के विचरणस्थान अंतरिक्ष में तथा पशुओं के विचरणस्थल
धरती पर घूमते हैं. वे सभी जानने योग्य बातों को जानते हैं, सब रसों के उत्पादक हैं एवं
अतिशय आनंददाता है. (६)
वायुरस्मा उपामन्थत्पिनष्टि स्मा कुनन्नमा.
केशी विषस्य पात्रेण यद्रुद्रेणापिबत्सह.. (७)
सूर्य रुद्रपुत्र मरुतों के साथ अपने किरण रूपी पात्रों द्वारा जब जल पीते हैं, उस समय
वायु उस जल को हिलाकर माध्यमिका वाणी को पूर्ण कर देते हैं. (७)
सूक्त—१३७ देवता—विश्वेदेव
उत देवा अवहितं देवा उन्नयथा पुनः. उतागश्चक्रुषं देवा देवा जीवयथा पुनः.. (१)
हे देवो! मुझ गिरे हुए को ऊपर उठाओ. मुझ पाप करने वाले की तुम रक्षा करो एवं मुझे
चिरजीवी बनाओ. (१)
द्वाविमौ वातौ वात आ सिन्धोरा परावतः.
दक्षं ते अन्य आ वातु परान्यो वातु यद्रपः.. (२)
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