ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextयम ने कहा—"हे कुमार नचिकेता! तुमने अपने ही मन से बिना पहियों वाला, एक दंड
वाला, सब ओर जाने वाला व नवीन रथ चाहा था. बिना विचारे ही तुम उस पर बैठ गए हो.
(३)
यं कुमार प्रावर्तयो रथं विप्रेभ्यस्परि. तं सामानु प्रावर्तत समितो नाव्याहितम्.. (४)
हे कुमार नचिकेता! तुमने मेधावियों से ऊपर आकाश में उस रथ को चलाया है. तुमने
उस रथ को पिता की सलाह के अनुसार चलाया है. तुम्हारे पिता की उपदेश रूपी नौका पर
चढ़ कर यह रथ यहां आया है." (४)
कः कुमारमजनयद्रथं को निरवर्तयत्. कः स्वित्तदद्य नो ब्रूयादनुदेयी यथाभवत्.. (५)
"इस बालक को किसने जन्म दिया एवं इस रथ को किसने यहां भेजा?" आज मुझे
यह बात कौन बताएगा कि इसे किस प्रकार उपदेश देकर लौटाया जाए? (५)
यथाभवदनुदेयी ततो अग्रमजायत. पुरस्ताद् बुध्न आततः पश्चान्निर्यणं कृतम्.. (६)
यह बालक जिस बात को सुनकर जीवलोक में लौटेगा, वह इसे पहले ही बता दी गई
थी. पहले यम के घर जाने का पिता का आदेश हुआ. इसके बाद लौटने की शर्त बताई गई."
(६)
इदं यमस्य सादनं देवमानं यदुच्यते. इयमस्य धम्यते नाळीरयं गीर्भिः परिष्कृतः.. (७)
यम का यही निवासस्थान देवों द्वारा निर्मित बताया जाता है. यम की प्रसन्नता के लिए
यह बांसुरी बजाई जाती है और इसे स्तुतियों से सुशोभित किया जाता है. (७)
सूक्त—१३६ देवता—अग्नि, सूर्य, वायु
केश्य१ग्निं केशी विषं केशी बिभर्ति रोदसी.
केशी विश्वं स्वर्दृशे केशीदं ज्योतिरुच्यते.. (१)
सूर्य अग्नि, जल और द्यावा-पृथिवी को धारण करते हैं. सूर्य प्रकाश के द्वारा संसार को
देखने योग्य बनाते हैं. इस प्रकाश का नाम ही सूर्य है. (१)
मुनयो वातरशनाः पिशङ्गा वसते मला.
वातस्यानु ध्राजिं यन्ति यद्देवासो अविक्षत.. (२)
वातरशन के मुनिपुत्र पीले रंग के वल्कल धारण करते हैं. देवों ने देवत्व प्राप्त किया एवं
वायु की गति से चलने लगे. (२)
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