ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextयह विशेष सृष्टि जिससे उत्पन्न हुई है, पता नहीं वह इसे धारण करता है अथवा नहीं.
विस्तृत आकाश में जो इस सृष्टि का अध्यक्ष है, पता नहीं वह उसे जानता है या नहीं जानता.
(७)
सूक्त—१३० देवता—प्रजापति
यो यज्ञो विश्वतस्तन्तुभिस्तत एकशतं देवकर्मेभिरायतः.
इमे वयन्ति पितरो य आययुः प्र वयाप वयेत्यासते तते.. (१)
आकाश आदि तंतुओं द्वारा जो सर्गरूप यज्ञ सब ओर विस्तृत है, वह सौ देव संबंधी
कर्मों से व्याप्त है. प्रजापति के पालक देव जो सारी सृष्टि में व्याप्त हैं, वे इस प्रपंच का
निर्माण करते हैं. वे ही इस विस्तृत विश्व के प्राण हैं. (१)
पुमाँ एनं तनुत उत्कृणत्ति पुमान्वि तत्ने अधि नाके अस्मिन्.
इमे मयूखा उप सेदुरू सदः सामानि चक्रुस्तसराण्योतवे.. (२)
प्रजापति इस सृष्टिरूपी यज्ञ को विस्तृत करता है एवं वही इसे संकुचित करता है. वही
धरती एवं स्वर्ग में इस सृष्टिरूपी यज्ञ का विस्तार करता है. प्रजापति की किरण के समान ये
देव यज्ञस्थान में बैठे थे. इन्होंने यज्ञरूपी वस्त्र को बुनने के लिए तिरछे धागे के रूप में
साममंत्रों का निर्माण किया. (२)
कासीत्प्रमा प्रतिमा किं निदानमाज्यं किमासीत्परिधिः क आसीत्.
छन्दः किमासीत्प्रउगं किमुक्थं यद्देवा देवमयजन्त विश्वे.. (३)
जिस समय सभी देवों ने प्रजापति का यज्ञ किया, उस समय क्या प्रमाण था? उस
समय देवमूर्ति क्या थी? उस यज्ञ का फल, घृत, समिधाएं, छंद और उक्थमंत्र क्या थे? (३)
अग्नेर्गायत्र्यभवत्सायुग्वोष्णिहया सविता सं बभूव.
अनुष्टुभा सोम उक्थैर्महस्वान्बृहस्पतेर्बृहती वाचमावत्.. (४)
गायत्री छंद अग्नि का तथा उष्णिक छंद सविता का सहायक हुआ. सोम अनुष्टुप् छंद से
तथा तेजस्वी सूर्य उक्थ छंद से युक्त हुए. बृहती छंद ने बृहस्पति के वचनों का सहारा लिया.
(४)
विराण्मित्रावरुणयोरभिश्रीरिन्द्रस्य त्रिष्टुबिह भागो अह्नः.
विश्वान्देवाञ्जगत्या विवेश तेन चाक्लृप्र ऋषयो मनुष्याः.. (५)
विराट् छंद मित्र और वरुण का आश्रित हुआ. त्रिष्टुप् छंद एवं माध्यंदिन का सोमरस इंद्र
के भाग में पड़ा. जगती छंद ने सभी देवों का आश्रय लिया. इन छंदों द्वारा ऋषियों और
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