ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextप्रलय की दशा में न असत् था और न सत् था. उस समय न लोक थे और न अंतरिक्ष
था. न कोई आवरण था और न ढकने योग्य पदार्थ था. कहीं भी न कोई प्राणी था और न
कोई सुख पहुंचाने वाला भोग था. उस समय गहन गंभीर जल भी नहीं था. (१)
न मृत्युरासीदमृतं न तर्हि न रात्र्या अह्न आसीत्प्रकेतः.
आनीदवातं स्वधया तदेकं तस्माद्धान्यन्न परः किं चनास.. (२)
उस समय न मृत्यु थी और न अमृत था. न रात्रि थी और न दिन का ज्ञान था. उस समय
एकमात्र ब्रह्मा ही स्वधा के साथ प्राणयुक्त था. उससे बढ़कर अन्य कुछ भी नहीं था. (२)
तम आसीत्तमसा गूळहमग्रेऽप्रकेतं सलिलं सर्वमा इदम्.
तुच्छ्येनाभ्वपिहितं यदासीत्तपसस्तन्महिनाजायतैकम्.. (३)
प्रलय दशा में सब कुछ अंधकार से घिरा हुआ था एवं सब ओर अंधकार था. यह सारा
दृश्यमान जगत् जल के रूप में अज्ञात था. सारा विश्व तुच्छ अंधकार से ढका था. महान् तप
से कारणकार्यरूप विभाग से रहित ब्रह्म उत्पन्न हुआ. (३)
कामस्तदग्रे समवर्तताधि मनसो रेतः प्रथमं यदासीत्.
सतो बन्धुमसति निरविन्दन्हृदि प्रतीष्या कवयो मनीषा.. (४)
परमेश्वर के मन में सबसे पहले सृष्टिरचना की इच्छा उत्पन्न हुई. वही सबसे पहले मन में
सृष्टि का बीज बनी. विद्वानों ने बुद्धि से हृदय में विचार किया एवं असत् में सत् के कारण को
खोजा. (४)
तिरश्चीनो विततो रश्मिरेषामधः स्विदासी३दुपरि स्विदासी३त्.
रेतोधा आसन्महिमान आसन्त्स्वधा अवस्तात्प्रयतिः परस्तात्.. (५)
आकाश आदि की सृष्टि करने वाले परमात्मा के तेज की किरणें क्या तिरछी थीं, नीचे
की ओर थीं अथवा ऊपर की ओर थीं? बीजरूप कर्म को धारण करने वाले जीव थे एवं
महान् आकाश आदि भोग्य थे. उस समय अन्न निकृष्ट एवं भोक्ता उत्कृष्ट था. (५)
को अद्धा वेद क इह प्र वोचत्कुत आजाता कुत इयं विसृष्टिः.
अर्वाग्देवा अस्य विसर्जनैनाथा को वेद यत आबभूव.. (६)
कौन संपूर्ण रूप से जानता है और कौन इस सृष्टि के विषय में कह सकता है? यह सृष्टि
किन-किन कारणों से उत्पन्न हुई है? देवगण भूतसृष्टि के बाद उत्पन्न हुए हैं. यह विश्व जिससे
उत्पन्न हुआ है, उसे कौन जानता है? (६)
इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न.
यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन्त्सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद.. (७)
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