ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1802 of 1855
Read in contextमेरे ऋत्विज् मेरे हव्य आदि का यजन मेरे कल्याण के लिए करें. मेरा मनोरथ पूर्ण हो. मैं
किसी भी पाप को न करूं. सभी देव मुझे आशीर्वाद दें. (४)
देवीः षळुर्वीरुरु नः कृणोत विश्वे देवास इह वीरयध्वम्.
मा हास्महि प्रजया मा तनूभिर्मा रधाम द्विषते सोम राजन्.. (५)
छः विशाल देवियां मेरी उन्नति करें. हे सब देवो! मेरे यज्ञ में वीरता का कार्य करो. मैं
शरीर और प्रजा संबंधी कोई हानि न उठाऊं. हे राजा सोम! हम शत्रु के सामने न हारें. (५)
अग्ने मन्युं प्रतिनुदन्परेषामदब्धो गोपाः परि पाहि नस्त्वम्.
प्रत्यञ्चो यन्तु निगुतः पुनस्तेऽमैषां चित्तं प्रबुधां वि नेशत्.. (६)
हे अग्नि! तुम शत्रुओं का क्रोध व्यर्थ करके अपराजेय बनकर हमारी रक्षा करो. शत्रु
अपने उद्देश्य में असफल होकर लौटे. यदि शत्रुओं के पास बुद्धि हो तो नष्ट हो जाए. (६)
धाता धातॄणां भुवनस्य यस्पतिर्देवं त्रातारमभिमातिषाहम्.
इमं यज्ञमश्विनोभा बृहस्पतिर्देवाः पान्तु यजमानं न्यर्थात्.. (७)
मैं सृष्टिकर्त्ताओं के स्रष्टा, सकल भुवन के रक्षक, दिव्य, सब भयों से छुड़ाने वाले एवं
शत्रुपराभवकारी सविता की स्तुति करता हूं. अश्विनीकुमार एवं बृहस्पति! इस यज्ञ तथा
यजमान की पाप से रक्षा करें. (७)
उरुव्यचा नो महिषः शर्म यंसदस्मिन्हवे पुरुहूतः पुरुक्षुः.
स नः प्रजायै हर्यश्व मृळयेन्द्र मा नो रीरिषो मा परा दाः.. (८)
परम विस्तृत, पूज्य, बहुतों द्वारा बुलाए गए व अनेक निवासस्थानों वाले इंद्र इस यज्ञ में
हमें कल्याण दें. हे हरि नामक अश्वों वाले इंद्र! तुम हमारी संतान को सुखी करो, हमारी हिंसा
मत करो और हमें मत त्यागो. (८)
ये नः सपत्ना अप ते भवन्त्विन्द्राग्निभ्यामव बाधामहे तान्.
वसवो रुद्रा आदित्या उपरिस्पृशं मोग्रं चेत्तारमधिराजमक्रन्.. (९)
जो हमारे शत्रु हैं, वे दूर चले जावें. हम इंद्र और अग्नि की सहायता से उन्हें बाधा
पहुंचावें. वसु, रुद्र और आदित्य मुझे सर्वश्रेष्ठ उन्नत शक्ति वाला चेतनायुक्त सर्वज्ञ एवं सबका
स्वामी बनावें. (९)
सूक्त—१२९ देवता—परमात्मा
नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत्.
किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद्गहनं गभीरम्.. (१)
ebook converter DEMO Watermarks*