ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसारा गांव शांत है. पैरों से चलने वाले पक्षी एवं गतिशील बाज पक्षी सब सो रहे हैं. (५)
यावया वृक्यं१वृकं यवय स्तेनमूर्म्ये. अथा नः सुतरा भव.. (६)
हे रात्रि! तुम भेड़िए, भेड़िए की पत्नी एवं चोर को हमसे दूर करो. तुम हमारे लिए
विशेष रीति से सुखकारी बनो. (६)
उप मा पेपिशत्तमः कृष्णं व्यक्तमस्थित. उष ऋणेव यातय.. (७)
सब वस्तुओं को ढकने वाला काला आकार विशेष रूप से मेरे पास तक आ गया है. हे
उषा! इस अंधकार को ऋण के समान हटाओ. (७)
उप ते गा इवाकरं वृणीष्व दुहितर्दिवः. रात्रि स्तोमं न जिग्युषे.. (८)
हे रात्रि! तुम आकाश की कन्या हो. मुझ शत्रुजयी का यह स्तोत्र तुम स्वीकार करो. मैं
गाय के समान तुम्हें यह स्तोत्र भेंट कर रहा हूं. (८)
सूक्त—१२८ देवता—विश्वेदेव
ममाग्ने वर्चो विहवेष्वस्तु वयं त्वेन्धानास्तन्वं पुषेम.
मह्यं नमन्तां प्रदिशश्चतस्रस्त्वयाध्यक्षेण पृतना जयेम.. (१)
हे अग्नि! संग्रामों में मेरा तेज उचित हो. हम तुम्हें प्रज्वलित करके अपने शरीर को पुष्ट
करें. चारों दिशाएं मेरे लिए झुकें. तुम्हें अध्यक्ष बनाकर हम शत्रु सेनाओं को जीतें. (१)
मम देवा विहवे सन्तु सर्व इन्द्रवन्तो मरुतो विष्णुरग्निः.
ममान्तरिक्षमुरुलोकमस्तु मह्यं वातः पवतां कामे अस्मिन्.. (२)
इंद्र सहित सब देव, मरुत्, विष्णु और अग्नि युद्ध में मेरा साथ दें. अंतरिक्ष के समान
विस्तृत लोक मेरा हो तथा वायु मेरी अभिलाषा के अनुसार चलकर मुझे पवित्र करें. (२)
मयि देवा द्रविणमा यजन्तां मय्याशीरस्तु मयि देवहूतिः.
दैव्या होतारो वनुषन्त पूर्वेऽरिष्टाः स्याम तन्वा सुवीराः.. (३)
देवगण मुझ स्तोता को धन दें. मैं यज्ञफल प्राप्त करूं एवं देवों को बुलाऊं. प्राचीन काल
में देवों के लिए हवन करने वाले मेरे अनुकूल हों. मैं शरीर से निरोग एवं शोभन संतान वाला
बनूं. (३)
मह्यं यजन्तु मम यानि हव्याकूतिः सत्या मनसो मे अस्तु.
एनो मा नि गां कतमच्चनाहं विश्वे देवासो अधि वोचता नः.. (४)
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