ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे पणियो! तुम इस स्थान से दूर भाग जाओ. घेरने वाले पर्वत को टक्करें मारती हुई
गाएं इस सत्याश्रित पर्वत से लौट जावें. बृहस्पति, सोम, पत्थर, ऋषि एवं ब्राह्मण इस गुप्त
स्थान को जान गए हैं.” (११)
सूक्त—१०९ देवता—विश्वेदेव
तेऽवदन्प्रथमा ब्रह्मकिल्बिषेऽकूपारः सलिलो मातरिश्वा.
वीळुहरास्तप उग्रो मयोभूरापो देवीः प्रथमजा ऋतेन.. (१)
बृहस्पति द्वारा पत्नीत्यागरूपी पाप किए जाने पर आदित्य, वरुण, वायु, जलती हुई
अग्नि, सुखदायी सोम, दिव्य जलों एवं प्रजापति द्वारा पहले उत्पादित संतानों ने कहा. (१)
सोमो राजा प्रथमो ब्रह्मजायां पुनः प्रायच्छदहृणीयमानः.
अन्वर्तिता वरुणो मित्र आसीदग्निर्होता हस्तगृह्या निनाय.. (२)
राजा सोम ने लज्जा का त्याग करके बृहस्पतिपत्नी जुहू को सबसे पहले उसे दिया.
मित्र और वरुण इस में मध्यस्थ बने. देवों को बुलाने वाले अग्नि उसे हाथ पकड़कर लाए. (२)
हस्तेनैव ग्राह्य आधिरस्या ब्रह्मजायेयमिति चेदवोचन्.
न दूताय प्रह्ये तस्थ एषा तथा राष्ट्रं गुप्तितं क्षत्रियस्य.. (३)
उन लोगों ने बृहस्पति से कहा—“यह तुम्हारी विवाहिता पत्नी है. तुम्हें इसका शरीर
हाथ से ग्रहण करना चाहिए. इन्हें खोजने को दूत गया था, उसके प्रति इसने समर्पण नहीं
किया था. यह शक्तिशाली राजा के राष्ट्र के समान सुरक्षित है. (३)
देवा एतस्यामवदन्त पूर्वे सप्तऋषयस्तपसे ये निषेदुः.
भीमा जाया ब्राह्मणस्योपनीता दुर्धा दधाति परमे व्योमन्.. (४)
देवों एवं तपस्या के लिए बैठे हुए सप्तऋषियों ने इस पत्नी की पवित्रता के विषय में
कहा है. बृहस्पति द्वारा विवाहिता यह नारी शुद्ध चरित्र वाली है. तप का प्रभाव बुरे पदार्थ को
भी आकाश में पहुंचा देता है. (४)
ब्रह्मचारी चरति वेविषद्विषः स देवानां भवत्येकमङ्गम.
तेन जायामन्वविन्दद् बृहस्पतिः सोमेन नीतां जुह्वं१ न देवाः.. (५)
स्त्री के अभाव में ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले जैसे बृहस्पति ने देवों की सेवा करके
यज्ञ के एक भाग के रूप में इसे प्राप्त किया, उसी प्रकार इस समय देवों से पाया. (५)
पुनर्वे देवा अददुः पुनर्मनुष्या उत. राजानः सत्यं कृण्वाना ब्रह्मजायां पुनर्ददुः.. (६)
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