ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextतुम जिन्हें चाहो, उन्हें ले सकती हो. युद्ध के बिना ये गाएं तुम्हें कौन देता? वैसे हमारे पास भी
तीखे आयुध हैं.” (५)
असेन्या वः पणयो वचांस्यनिषव्यास्तन्वः सन्तु पापीः.
अधृष्टो व एतवा अस्तु पन्था बृहस्पतिर्व उभया न मृळात्.. (६)
सरमा बोली—“हे पणियो! तुम्हारी बातें सैनिकों की बातों के समान नहीं हैं. तुम्हारे
पापी शरीर कहीं इंद्र के बाणों के शिकार न हो जावें? कहीं तुम्हारा मार्ग आक्रमणकारी देवों
द्वारा पददलित न हो जाए? मेरी बात न मानने पर कहीं बृहस्पति तुम्हें कष्ट न दें.” (६)
अयं निधिः सरमे अद्रिबुध्नो गोभिरश्वेभिर्वसुभिर्न्युष्टः.
रक्षन्ति तं पणयो ये सुगोपा रेकु पदमलकमा जगन्थ.. (७)
पणियों ने कहा—“हे सरमा! हमारी गायरूपी संपत्ति पर्वतों द्वारा सुरक्षित है. यह गायों,
घोड़ों और धनों से प्राप्त है. रक्षणसमर्थ पणि इस संपत्ति की रक्षा करते हैं. गायों के रंभाने के
शब्द से सुशोभित हमारे इस स्थान पर तुम व्यर्थ आई हो.” (७)
एह गमन्नृषयः सोमशिता अयास्यो अङ्गिरसो नवग्वाः.
त एतमूर्वं वि भजन्त गोनामथैतद्वचः पणयो वमन्निन्.. (८)
सरमा बोली—“सोमपान करके मतवाले अंगिरागोत्रीय अयास्य ऋषि एवं नवगु ऋषियों
का समूह यहां आएगा. वे इस गोधन का विभाग करके ले जावेंगे. उस समय तुमको यह
अभिमान भरा वचन छोड़ना पड़ेगा.” (८)
एवा च त्वं सरम आजगन्थ प्रबाधिता सहसा दैव्येन.
स्वसारं त्वा कृणवै मा पुनर्गा अप ते गवां सुभगे भजाम.. (९)
पणियों ने कहा—“हे सरमा! तुम देवों की शक्ति से डरकर यहां आई हो. हम तुम्हें
अपनी बहिन बनाते हैं. तुम यहां से मत जाओ. हे सुंदरी! हम तुम्हें अपनी गायों का भाग देते
हैं.” (९)
नाहं वेद भ्रातृत्वं नो स्वसृत्वमिन्द्रो विदुरङ्गिरसश्च घोराः.
गोकामा मे अच्छदयन्दायमपात इत पणयो वरीयः.. (१०)
सरमा ने कहा—“हे पणियो! मैं बहिन और भाई का संबंध नहीं जानती. इस संबंध को
तो भयानक इंद्र एवं अंगिराओं का समूह जानता है. गायों के अभिलाषी देवों ने मुझे सुरक्षित
रूप में भेजा है. इसी कारण मैं आई हूं. तुम इस गोसमूह को छोड़कर दूर भाग जाओ. (१०)
दूरमित पणयो वरीय उद्गावो यन्तु मिनतीरृतेन.
बृहस्पतिर्या अविन्दन्निगूळ्हाः सोमो ग्रावाण ऋषयश्च विप्राः.. (११)
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