ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1769 of 1855
Read in contextअभिलाषाएं पूरी करते हैं. (४)
दक्षिणावान्प्रथमो हूत एति दक्षिणावान्ग्रामणीरग्रमेति.
तमेव मन्ये नृपतिं जनानां यः प्रथमो दक्षिणामाविवाय.. (५)
ऋत्विजों द्वारा बुलाया गया यजमान सबसे प्रमुख होता है एवं गांव का मुखिया होकर
आगे चलता है. जो सबसे पहले दक्षिणा देता है, उसीको हम मानवों का पालक मानते हैं. (५)
तमेव ऋषिं तमु ब्रह्माणमाहुर्यज्ञन्यं सामगामुक्थशासम्.
स शुक्रस्य तन्वो वेद तिस्रो यः प्रथमो दक्षिणया रराध.. (६)
जो सबसे पहले दक्षिणा देता है, उसीको ऋषि, ब्रह्मा, यज्ञ के नेता सामगानकर्त्ता एवं
स्तोता जानते हैं. वे अग्नि की तीनों मूर्तियों को जानते हैं. (६)
दक्षिणाश्वं दक्षिणा गां ददाति दक्षिणा चन्द्रमुत यद्धिरणयम्.
दक्षिणात्नं वनुते यो न आत्मा दक्षिणां वर्म कृणुते विजानन्.. (७)
दक्षिणा घोड़े, गाएं एवं मन को प्रसन्न करने वाला सोना देती है. दक्षिणा ही आत्मारूपी
अन्न को देती है. विद्वान् व्यक्ति दक्षिणा को कवच के समान रक्षा का साधन बनाते हैं. (७)
न भोजा ममुर्न न्यर्थमीयुर्न रिष्यन्ति न व्यथन्ते ह भोजा:.
इदं यद्विश्वं भुवनं स्वश्चैतत्सर्वं दक्षिणेभ्यो ददाति.. (८)
दक्षिणा देने वाले मरते नहीं, अपितु देव बनकर अमरता पा लेते हैं. वे न दरिद्र बनते हैं
और न व्यथा अथवा क्लेश भोगते हैं. यह सारा विश्व एवं स्वर्ग जो है, वह सब दक्षिणा हमें
देती हैं. (८)
भोजा जिग्युः सुरभिं योनिमग्रे भोजा जिग्युर्वध्वं१ या सुवासा:.
भोजा जिग्युरन्तः पेयं सुराया भोजा जिग्युर्ये अह्रुताः प्रयन्ति.. (९)
दक्षिणा देने वाले लोग दूध देने वाली गाय सबसे पहले प्राप्त करते हैं तथा वे ही शोभन
वस्त्रों वाली वधू प्राप्त करते हैं. दाता लोग पेय के रूप में शराब पाते हैं एवं चढ़ाई करने वाले
शत्रु को जीतते हैं. (९)
भोजायाश्वं सं मृजन्त्याशुं भोजायास्ते कन्या३ शुम्भमाना.
भोजस्येदं पुष्करिणीव वेश्म परिष्कृतं देवमानेव चित्रम्.. (१०)
दक्षिणा देने वाले को शीघ्र ही घोड़ा दिया जाता है. उसीको वस्त्र अलंकार से शोभित
कन्या मिलती है. उसे पुष्करिणी के समान साफ और देवालय के समान विचित्र घर दिया
जाता है. (१०)
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