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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1768 of 1855

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Page 1768

प्रकार तुम गायों के थनों में दूध भरो. तुम मजदूरों के समान पसीने से भीग जाओ तथा
चरागाह में आहार पाने वाली दुबली गाय के समान यज्ञ में अपना आहार प्राप्त करो. (१०)
ऋध्याम स्तोमं सनुयाम वाजमा नो मन्त्रं सरथेहोप यातम्.
यशो न पक्वं मधु गोष्वन्तरा भूतांशो अश्विनोः काममप्राः.. (११)
हे अश्विनीकुमारो! हम स्तुतियों का विस्तार करते हैं एवं अन्न बांटते हैं. तुम रथ पर
सवार होकर हमारे यज्ञ में आओ. गायों के थनों में विस्तृत यज्ञ के समान दूध है. भूतांश ऋषि
ने अश्विनीकुमारों का यह स्तोत्र बनाकर अपनी अभिलाषा प्राप्त की. (११)
सूक्त—१०७                   देवता—प्रजापति की पुत्री
दक्षिणा
आविर्भून्महि माघोनमेषां विश्वं जीवं तमसो निरमोचि.
महि ज्योतिः पितृभिर्दत्तमागादुरुः पन्था दक्षिणाया अदर्शि.. (१)
इन यजमानों का यज्ञ पूरा करने के लिए इंद्र का महान् तेज प्रकट हुआ. उसके बाद
सभी जीव अंधकार से मुक्त हुए. पितरों द्वारा दी हुई महान् ज्योति हमारे सामने आई. उसी ने
दक्षिणा का विस्तृत मार्ग दिखाया. (१)
उच्चा दिवि दक्षिणावन्तो अस्थुर्ये अश्वदाः सह ते सूर्येण.
हिरण्यदा अमृतत्वं भजन्ते वासोदाः सोम प्र तिरन्त आयुः.. (२)
दक्षिणा देने वाले स्वर्ग में ऊंचे स्थान पर बैठते हैं. घोड़ा दान करने वाले सूर्य के साथ
स्थित होते हैं. सोम देने वाले अमरता पाते हैं तथा वस्त्र दान करने वाले सोम प्राप्त करके पूर्ण
आयु पार करते हैं. (२)
दैवी पूर्तिर्दक्षिणा देवयज्या न कवारिभ्यो नहि ते पृणन्ति.
अथा नरः प्रयतदक्षिणासोऽवद्यभिया बहवः पृणन्ति.. (३)
दक्षिणा यज्ञादि दिव्य कर्मों को पूर्ण करती है एवं देवपूजा का अंग है. देवगण यज्ञ न
करने वालों के काम पूरे नहीं करते. जो लोग पवित्र दक्षिणा देते हैं व बदनामी से डरते हैं, वे
अपने सभी काम पूरे करते हैं. (३)
शतधारं वायुमर्कं स्वर्विदं नृचक्षसस्ते अभि चक्षते हविः.
ये पृणन्ति प्र च यच्छन्ति सङ्‌गमे ते दक्षिणां दुहते सप्तमातरम्.. (४)
सैकड़ों धाराओं में बहने वाले वायु, सूर्य, आकाश तथा अन्य मानवहितकारी देवों के
लिए हव्य दिया जाता है. जो लोग सात अधिकारी पुरोहितों को प्रसन्न करते हैं, वे अपनी
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