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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1689 of 1855

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Page 1689

अध्वर्यु यज्ञ में विविध कार्य करता है. (११)
सूक्त—७२ देवता—देव
देवानां नु वयं जाना प्र वोचाम विपन्यया.
उक्थेषु शस्यमानेषु यः पश्यादुत्तरे युगे.. (१)
हम स्पष्ट शब्दों में देवों की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं. ये देव भविष्य में स्तोत्रों के
उच्चारण के समय स्तोता को देखेंगे. (१)
ब्रह्मणस्पतिरेता सं कर्मार इवाधमत्. देवानां पूर्व्ये युगेऽसतः सदजायत.. (२)
लोहार जिस प्रकार धौंकनी चलाता है, उसी प्रकार ब्रह्मणस्पति ने देवों को उत्पन्न किया.
देवों से पूर्व के समय में असत् से सत् उत्पन्न हुआ. (२)
देवानां युगे प्रथमेऽसतः सदजायत. तदाशा अन्वजायन्त तदुत्तानपदस्परि.. (३)
देवों की उत्पत्ति से पहले के समय में असत् से सत् उत्पन्न हुआ. इसके बाद दिशाएं
उत्पन्न हुईं. दिशाओं से वृक्ष उत्पन्न हुए. (३)
भूर्जज्ञ उत्तानपदो भुव आशा अजायन्त. अदितेर्दक्षो अजायत दक्षाद्वदितिः परि.. (४)
वृक्षों से भूमि उत्पन्न हुई एवं भूमि से दिशाएं उत्पन्न हुईं. अदिति से दक्ष उत्पन्न हुए और
बाद में दक्ष से अदिति उत्पन्न हुई. (४)
अदितिर्ह्यजनिष्ट दक्ष या दुहिता तव. तां देवा अन्वजायन्त भद्रा अमृतबन्धवः.. (५)
हे दक्ष! तुम्हारी पुत्री अदिति ने देवों को उत्पन्न किया. अदिति के पश्चात् प्रशंसनीय एवं
अमृत के बंधु देवों ने जन्म लिया. (५)
यद्देवा अदः सलिले सुसंरब्धा अतिष्ठत. अत्रा वो नृत्यतामिव तीव्रो रेणुरपायत.. (६)
हे देवो! जब तुम इस जल में रहकर अपने को जानते हुए स्थित थे, तब तुम नृत्य सा
करने लगे. इससे बहुत धूल उड़ी. (६)
यद्देवा यतयो यथा भुवनान्यपिन्वत. अत्रा समुद्र आ गूळ्हमा सूर्यमजभर्तन.. (७)
बादल जिस प्रकार वर्षा द्वारा संसार को भरते हैं, उसी प्रकार देवों ने संसार को ढक
लिया. उन्होंने सागर में ढके हुए सूर्य को चमकने के लिए बाहर निकाला. (७)
अष्टौ पुत्रासो अदितेर्ये जातास्तन्व१ स्परि.
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