ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1688 of 1855
Read in contextयदीं शृणोत्यलकं शृणोति नहि प्रवेद सुकृतस्य पन्थाम्.. (६)
जो वेद पढ़ने वाला, मित्र को जानने वाले मित्र को त्याग देता है, उसकी वाणी में कोई
सार नहीं होता. वह पुरुष जो भी सुनता है, व्यर्थ सुनता है. वह सत्कर्म का मार्ग नहीं जानता.
(६)
अक्षण्वन्तः कर्णवन्तः सखायो मनोजवेष्वसमा बभूवुः.
आदघ्नास उपकक्षास उ त्वे हृदा इव स्नात्वा उ त्वे ददृश्रे.. (७)
आंखों और कानों वाले मित्र मन का भाव प्रकाशित करने में अद्वितीय होते हैं. कुछ
लोग कमर तक गहरे तालाब के समान, कुछ मुख तक गहरे तालाब के समान एवं कुछ स्नान
करने योग्य तालाबों के समान दिखाई देते हैं. (७)
हृदा तष्टेषु मनसो जवेषु यद् ब्राह्मणाः संयजन्ते सखायः.
अत्राह त्वं वि जहुर्वेद्याभिरोहब्रह्माणो वि चरन्त्यु त्वे.. (८)
जिस समय समान ज्ञान वाले अनेक ब्राह्मण हृदय द्वारा समझे जाने वाले वेदार्थ के
गुणदोष पर विचार करने पर एकत्र होते हैं, उस समय किसी-किसी को विशेष ज्ञान होता है
एवं कोई कोई स्तोत्र का अर्थ जानकर घूमते हैं. (८)
इमे ये नार्वाङ्न परश्चरन्ति न ब्राह्मणासो न सुतेकरासः.
त एते वाचमभिपद्य पापया सिरीस्तन्त्रं तन्वते अप्रजज्ञयः.. (९)
ये अविद्वान् लोग इस लोक में वेद को जानने वाले ब्राह्मणों द्वारा एवं परलोकवासी देवों
के साथ यज्ञकर्म का आचरण नहीं करते. वे न तो स्तोता हैं और न सोमयज्ञ करने वाले हैं. ये
पाप का आश्रय लेने वाली लौकिक वाणी से युक्त होकर मूर्ख के समान हल चलाते हुए
कृषिकर्म करते हैं. (९)
सर्वे नन्दन्ति यशसागतेन सभासाहेन सख्या सखायः.
किल्विषस्पृत्पितुषणिर्ह्येषामरं हितो भवति वाजिनाय.. (१०)
मित्र के समान आचरण करने वाले एवं सभा में यश प्रदान करने वाले यश को पाकर
प्रसन्न होते हैं. यश के कारण पाप दूर होता है. अन्न मिलता है एवं शक्ति प्राप्त होती है. इस
प्रकार यश से अनेक प्रकार का हित होता है. (१०)
ऋचां त्वः पोषमास्ते पुपुष्वान्गायत्रं त्वो गायति शक्वरीषु.
ब्रह्मा त्वो वदति जातविद्यां यज्ञस्य मात्रां वि मिमीति उ त्वः.. (११)
कुछ होता अनेक ऋचाओं का उच्चारण करते हुए यज्ञ में सहायक होते हैं एवं कुछ लोग
गायत्री छंद में साममंत्रों को गाते हैं. ब्रह्मा नामक पुरोहित प्रायश्चित्त की व्याख्या करता है एवं
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