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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1690 of 1855

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Page 1690

देवाँ उप प्रैत्सप्तभिः परा मार्ताण्डमास्यत्.. (८)
अदिति के शरीर से आठ पुत्र उत्पन्न हुए. उन में से सात के साथ वह देवलोक में चली
गई. आठवां सूर्य आकाश में स्थित हुआ. (८)
सप्तभिः पुत्रैरदितिरुप प्रैत्पूर्व्यं युगम्. प्रजायै मृत्यवे त्वत्पुनर्मार्ताण्डमाभरत्.. (९)
प्राचीनकाल में अदिति सात पुत्रों के साथ देवलोक में चली गई. केवल सूर्य को प्रजाओं
के जन्म-मरण के लिए आकाश में स्थिर किया. (९)
सूक्त—७३ देवता—इंद्र व मरुत्
जनिष्ठा उग्रः सहसे तुराय मन्द्र ओजिष्ठो बहुलाभिमानः.
अवर्धन्निन्द्रं मरुतश्चिदत्र माता यद्वीरं दधनद्धनिष्ठा.. (१)
गर्भ धारण करने वाली इंद्र की माता ने जिस इंद्र को जन्म दिया, उस समय मरुतों ने
वीर इंद्र की प्रशंसा इस प्रकार की—“तुम शक्तिप्रदर्शन और शत्रुनाश के लिए उत्पन्न हुए हो.
तुम प्रशंसनीय, ओजस्वी एवं अधिक अभिमानी हो.” (१)
द्रुहो निष्पत्ता पृशनी चिदेवैः पुरू शंसेन वावृधुष्ट इन्द्रम्.
अभीवृतेव ता महापदेन ध्वान्तातप्रपित्वादुदरन्त गर्भाः.. (२)
मरुतों के साथ-साथ इंद्र की सेना भी इंद्र के समीप बैठी है. मरुतों ने विशाल स्तोत्रों
द्वारा इंद्र को बढ़ाया. जिस प्रकार बंद गोष्ठ के खुलने पर गाएं बाहर निकलती हैं, उसी प्रकार
अंधकाररूप मेघ के भीतर से वर्षा का जल बाहर निकला. (२)
ऋष्वा ते पादा प्र यज्जिगास्यवर्धन्वाजा उत ये चिदत्र.
त्वमिन्द्र सालावृकान्त्सहस्रमासन् दधिषे अश्विना ववृत्याः.. (३)
हे इंद्र! तुम्हारे चरण महान् हैं. तुम जिस समय चलते हो, उस समय ऋभुगण एवं वहां
उपस्थित देव बढ़ते हैं. तुम हजार भेड़ियों को मुख में धारण करते हो तथा अश्विनीकुमारों को
घुमा सकते हो. (३)
समना तूर्णिरुप यासि यज्ञमा नासत्या सख्याय वक्षि.
वसाव्यामिन्द्र धारयः सहस्राश्विना शूर ददतुर्मघानि.. (४)
हे इंद्र! संग्राम की जल्दी होने पर भी तुम यज्ञ में जाते हो. उस समय तुम अश्विनीकुमारों
की मित्रता धारण करते हो. हे शूर इंद्र! उस समय तुम हमारे लिए हजार धन धारण करते हो.
अश्विनीकुमार हमारे लिए धन दें. (४)
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