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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1648 of 1855

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Page 1648

मैं होता के रथ में बैठा हूं और यज्ञ करूंगा. सभी देवों और मरुतों ने मुझे इस कार्य के
लिए प्रेरित किया है. हे अश्विनीकुमारो! तुम्हें प्रतिदिन अध्वर्यु का काम करना है. चंद्रमा ब्रह्मा
होंगे. तुम दोनों के लिए आहुति प्राप्त होगी. (२)
अयं यो होता किरु स यमस्य कमप्यूहे यत्समञ्जन्ति देवाः.
अहरहर्जातये मासिमास्यथा देवा दधिरे हव्यवाहम्.. (३)
यह जो होता है, वह क्या काम करता है? वह यजमान के द्वारा होम किया हुआ हव्य-
वहन करता है. उस हव्य को देव धारण करते हैं. प्रतिदिन और प्रतिमास हवन होता है. इस
कार्य के लिए देवों ने मुझे नियुक्त किया है. (३)
मां देवा दधिरे हव्यवाहमपम्लुक्तं बहु कृच्छा चरन्तम्.
अग्निर्विद्वान्यज्ञं नः कल्पयाति पञ्चयामं त्रिवृतं सप्ततन्तुम्.. (४)
मुझ पलायन करने वाले एवं अनेक दुर्गम स्थानों में घूमने वाले अग्नि को देवों ने हव्य-
वहन करने वाला नियुक्त किया था. देवों ने यह सोचा था कि ये अग्नि सब कुछ जानते हैं,
इसलिए हमारे पांच मार्गों, तीन प्रकारों एवं सात छंदों की स्तुतियों वाले यज्ञ को पूर्ण करेंगे.
(४)
आ वो यक्ष्यमृतत्वं सुवीरं यथा वो देवा वरिवः कराणि.
आ बाह्वोर्वज्रमिन्द्रस्य धेयामथेमा विश्वाः पृतना जयाति.. (५)
हे देवो! मैं तुम्हारी हव्य-वहनरूपी सेवा करता हूं, इसलिए तुमसे मरणरहित होने एवं
संतानयुक्त होने की याचना करता हूं. मैं इंद्र की दोनों भुजाओं में वज्र देता हूं, जिससे वे सभी
शत्रु सेनाओं को जीतते हैं.” (५)
त्रीणि शता त्री सहस्राण्यग्निं त्रिंशच्च देवा नव चासपर्यन्.
औक्षन्घृतैरस्तृणन्बर्हिरस्मा आदिद्धोतारं न्यसादयन्त.. (६)
तीन हजार तीन सौ उनतालीस देवों ने अग्नि की सेवा की. देवों ने अग्नि को घृत से
भिगोया, उनके लिए कुश बिछाए एवं होता बनाकर यज्ञ में बैठाया. (६)
सूक्त—५३ देवता—अग्नि
यमैच्छाम मनसा सोऽयमागाद्यज्ञस्य विद्वान्परुषश्चिकित्वान्.
स नो यक्षद्देवताता यजीयान्हि हि षत्सदन्तरः पूर्वो अस्मत्.. (१)
हम मन से जिन अग्नि की कामना करते थे, वे आ गए हैं. अग्नि यज्ञ को जानते हैं और
अपने शरीर को पूर्ण करते हैं. यज्ञकर्त्ताओं में श्रेष्ठ अग्नि हमारे यज्ञ में होम करते हैं. हम देवों
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