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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1649 of 1855

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Page 1649

से पूर्व में, वर्तमान अग्नि देवों के मध्य बैठे हैं. (१)
अराधि होता निषदा यजीयानभि प्रयांसि सुधितानि हि ख्यत्.
यजामहै यज्ञियान्हन्त देवाँ ईळामहा ईड्याँ आज्येन.. (२)
होता और यज्ञकर्त्ताओं में श्रेष्ठ अग्नि यज्ञवेदी पर बैठकर आहुति के योग्य हुए हैं. वे
भली-भांति रखे हुए चरु, पुरोडाश आदि को सब ओर से इसलिए देखते हैं कि यज्ञ के योग्य
देवों का शीघ्र होम करें और स्तुतियोग्य देवों की स्तुति करें. (२)
साध्वीमकद्देववीतिं नो अद्य यज्ञस्य जिह्वामविदाम गुह्याम्.
स आयुरागात्सुरभिर्वसानो भद्रामकद्देवहूतिं नो अद्य.. (३)
अग्नि हमारे देवागमन वाले यज्ञकार्य को भली-भांति पूर्ण करें. हम यज्ञ की गूढ़ जिह्वा
के समान अग्नि को प्राप्त कर चुके हैं. वे अग्नि सुगंधि एवं आयु को धारण करते हुए आए हैं
एवं आज हमारे देवाह्वानरूपी यज्ञ को कल्याणमय किया है. (३)
तदद्य वाचः प्रथमं मसीय येनासुराँ अभि देवा असाम.
ऊर्जाद उत यज्ञियासः पञ्च जना मम होत्रं जुषध्वम्.. (४)
हम आज उस प्रमुख वचन का उच्चारण करें, जिसके कारण हम तथा देवगण असुरों
को पराजित कर सकें. हे अन्न भक्षण करने वाले एवं यज्ञ के योग्य पंचजनो! तुम हमारे होम
का सेवन करो. (४)
पञ्च जना मम होत्रं जुषन्तां गोजाता उत ये यज्ञियासः.
पृथिवी नः पार्थिवात्पात्वंहसोऽन्तरिक्षं दिव्यात्पात्वस्मान्.. (५)
पंचजन मेरे आह्वान को स्वीकार करें. भूमि से उत्पन्न एवं यज्ञपात्र देव मेरे अग्निहोत्र का
सेवन करें. पृथ्वी हमें पार्थिव पाप तथा अंतरिक्ष हमें दिव्य पाप से बचावे. (५)
तन्तुं तन्वन्नजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्.
अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्.. (६)
हे अग्नि! तुम यज्ञ का विस्तार करते हुए लोकभासक सूर्य का अनुगमन करो तथा उन
ज्योतिपूर्ण मार्गों की रक्षा करो, जिन्हें यज्ञकर्म द्वारा प्राप्त किया जाता है. अग्नि स्तोताओं का
कार्य दोषरहित बनावें. हे अग्नि! तुम स्तुतियोग्य बनो और देवसमूह को यज्ञाभिमुख बनाओ.
(६)
अक्षानहो नह्यतनोत सोम्या इष्कृणुध्वं रशना ओत पिंशत.
अष्टावन्धुरं वहताभितो रथं येन देवासो अनयन्नभि प्रियम्.. (७)
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