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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1647 of 1855

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Page 1647

तस्माद्भिया वरुण दूरमायं गौरो न क्षेप्रोरविजे ज्यायाः.. (६)
अग्नि ने कहा—"हे देवो! रथी जिस प्रकार मार्ग पर चला जाता है, उसी प्रकार मेरे तीन
भाई क्रमशः हव्य-वहन करते हुए समाप्त हो गए. हे वरुण! इसी डर से मैं दूर चला आया हूं.
गौरमृग जिस प्रकार धनुर्धारी की ज्या से डरता है, उसी प्रकार मैं हव्य वहन कार्य से कांपता
हूं." (६)
कुर्मस्त आयुरजरं यदग्ने यथा युक्तो जातवेदो न रिष्याः.
अथा वहासि सुमनस्यमानो भागं देवेभ्यो हविषः सुजात.. (७)
देवों ने कहा—"हे अग्नि! हम तुम्हें जरारहित आयु प्रदान करते हैं. हे जातवेद! इस
आयु से युक्त होकर तुम नहीं मरोगे. हे शोभन जन्म वाले अग्नि! तुम प्रसन्नचित्त होकर
यजमान द्वारा दिए गए हव्य का भाग देवों के पास ले जाओ." (७)
प्रयाजान्मे अनुयाजाँश्च केवलानूर्जस्वन्तं हविषो दत्त भागम्.
घृतं चापां पुरुषं चौषधीनामग्नेश्च दीर्घमायुरस्तु देवाः.. (८)
अग्नि ने कहा—"हे देवो! तुम मुझे यज्ञ के प्रारंभ वाले, अंत वाले तथा असाधारण हव्य
भाग अधिक मात्रा में दो. तुम मुझे जल का सार अंश घृत, ओषधियों से उत्पन्न प्रधान भाग
एवं दीर्घ आयु दो." (८)
तव प्रयाजा अनुयाजाश्च केवल ऊर्जस्वन्तो हविषः सन्तु भागाः.
तवाग्ने यज्ञोऽयमस्तु सर्वस्तुभ्यं नमन्तां प्रदिशश्चतस्रः.. (९)
देवों ने कहा—"हे अग्नि! यज्ञ के प्रारंभ वाले, अंत वाले तथा असाधारण हव्य भाग
अधिक मात्रा में तुम्हारे हों. यह पूरा यज्ञ तुम्हारा हो और चारों दिशाएं तुम्हारे सामने आदर से
झुकें." (९)
सूक्त—५२ देवता—विश्वेदेव
विश्वे देवाः शास्तन मा यथेह होता वृतो मनवै यन्निषद्य.
प्र मे ब्रूत भागधेयं यथा वो येन पथा हव्यमा वो वहानि.. (१)
अग्नि ने मन ही मन कहा—"हे विश्वेदेवो! तुमने मुझे होता के रूप में वरण किया है.
मुझे यहां बैठकर जो मंत्र पढ़ना है, वह मुझे बताओ. मेरा और तुम्हारा भाग कौन सा है, यह
मुझे बताओ. मुझे वह मार्ग भी बताओ, जिससे मैं हव्य तुम्हारे पास ले जाऊं. (१)
अहं होता न्यसीदं यजीयान् विश्वे देवा मरुतो मा जुनन्ति.
अहरहरश्विनाध्वर्यवं वां ब्रह्मा समिद्भवति साहुतिर्वाम्.. (२)
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