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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1616 of 1855

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Page 1616

उषा उच्छन्त्यप बाधतामघं स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (३)
विस्तृत एवं माता-पिता के समान द्यावा-पृथिवी से हम प्रार्थना करते हैं कि वे सुख पाने
के लिए हम निष्पाप लोगों की रक्षा करें. अंधकार का विनाश करती हुई उषा हमारे पापों को
समाप्त करे. हम प्रज्वलित अग्नि से सुख की याचना करते हैं. (३)
इयं न उसा प्रथमा सुदेव्यं रेवत्सनिभ्यो रेवती व्युच्छतु.
आरे मन्युं दुर्विदत्रस्य धीमहि स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (४)
धन की स्वामिनी, मुख्या एवं पापों का नाश करने वाली उषा हमें दान योग्य धन दे. हम
बुरे धन वाले व्यक्ति के क्रोध से दूर रहना चाहते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की
याचना करते हैं. (४)
प्र या: सिस्रते सूर्यस्य रश्मिभिर्ज्योतिर्भरन्तीरुषसो व्युष्टिषु.
भद्रा नो अद्य श्रवसे व्युच्छत स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (५)
जो उषाएं सूर्यकिरणों के साथ मिलती हैं एवं प्रकाश को धारण करके अंधकार का नाश
करती हैं, वे आज हमें अन्न देने के लिए अनुकूल हों एवं अंधकार का नाश करें. हम प्रज्वलित
अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (५)
अनमीवा उषस आ चरन्तु न उदग्नयो जिहतां ज्योतिषा बृहत्.
आयुक्षातामश्विना तूतुजिं रथं स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (६)
रोगरहित उषाएं हमारे पास आवें एवं विस्तृत अग्नि तेज से मिलकर ऊपर उठें.
अश्विनीकुमार हमारे पास आने के लिए अपने तेज चलने वाले रथ में घोड़े जोतें. हम
प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (६)
श्रेष्ठं नो अद्य सवितर्वरेण्यं भागमा सुव स हि रत्नधा असि.
रायो जनित्रीं धिषणामुप ब्रुवे स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (७)
हे सविता देव! आज हमें श्रेष्ठ एवं वरण करने योग्य धन दो. तुम उत्तम रत्न देने वाले
हो. हम धन उत्पन्न करने वाली स्तुतियां बोलते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना
करते हैं. (७)
पिपर्तु मा तद्ॠतस्य प्रवाचनं देवानां यन्मनुष्या३ अमन्महि.
विश्वा इदुस्राः स्पळुदेति सूर्यः स्वस्त्य१ग्निं समिधानमीमहे.. (८)
यज्ञों का देवस्तुतिरूपी भाग हमारी रक्षा करे. हम उसे जानते हैं. सूर्य प्रत्येक प्रभात में
सभी वस्तुओं को स्पष्ट करते हुए आते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते
हैं. (८)
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