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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1614 of 1855

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Page 1614

अक्षासो अस्य वि तिरन्ति कामं प्रतिदीव्ने दधत आ कृतानि.. (६)
जुआरी शरीर से दीप्त होकर एवं यह कहता हुआ जुआघर में जाता है कि कौन धन
वाला आया है? मैं उसे जीतूंगा. कभी-कभी पासे जुआरी की कामना पूरी करते हैं और कभी
उसके विरोधी जुआरी के अनुकूल कर्म धारण करके उसकी इच्छा पूरी करते हैं. (६)
अक्षास इदङ्कुशिनो नितोदिनो निकृत्वानस्तपनास्तापयिष्णवः.
कुमारदेष्णा जयतः पुनर्हणो मध्वा सम्पृक्ताः कितवस्य बर्हणा.. (७)
कभी-कभी पासे अंकुश के समान चुभने वाले, हृदय को टुकड़े-टुकड़े करने वाले एवं
गरम पदार्थ के समान जलाने वाले बन जाते हैं. पासे जीतने वाले जुआरी के लिए पुत्रजन्म के
समान आनंददाता एवं मधु से लिपटे हुए लगते हैं, पर हारने वाले की तो जान निकाल लेते हैं.
(७)
त्रिपञ्चाशः क्रीळति व्रात एषां देवइव सविता सत्यधर्मा.
उग्रस्य चिन्मन्यवे ना नमन्ते राजा चिदेभ्यो नम इत्कृणोति.. (८)
सच्चे धर्म वाले सविता देव जिस प्रकार आकाश में विचरण करते हैं, उसी प्रकार
तिरेपन पासे जुआ खेलने के तख्ते पर क्रीड़ा करते हैं. ये पासे उग्र एवं क्रोधी के भी वश में
नहीं आते. राजा तक इन पासों के सामने झुकता है. (८)
नीचा वर्तन्त उपरि स्फुरन्त्यहस्तासो हस्तवन्तं सहन्ते.
दिव्या अङ्गारा इरिणे न्युप्ताः शीताः सन्तो हृदयं निर्दहन्ति.. (९)
पासे कभी नीचे गिरते हैं और कभी ऊपर उछलते हैं. ये बिना हाथ के होकर भी
हाथवालों को पराजित करते हैं. ये दिव्य पासे जुआ खेलने के तख्ते पर फेंके जाते समय
अंगार बन जाते हैं. ये छूने में ठंडे हैं, पर हारने वाले के मन को जलाते हैं. (९)
जाया तप्यते कितवस्य हीना माता पुत्रस्य चरतः क्व स्वित्.
ऋणावा बिभ्यद्धनमिच्छमानोऽन्येषामस्तमुप नक्तमेति.. (१०)
अनिश्चित स्थान में घूमने वाले जुआरी की पत्नी उसके बिना दुःखी होती है एवं माता
परेशान रहती है. दूसरों का कर्ज चढ़ जाने से जुआरी डरता है. वह दूसरों के धन को चुराने
की इच्छा करता है. रात में घर आता है. (१०)
स्त्रियं दृष्ट्वाय कितवं ततापान्येषां जायां सुकृतं च योनिम्.
पूर्वाह्णे अश्वान्युयुजे हि बभ्रूनत्सो अग्नेरन्ते वृषलः पपाद.. (११)
जुआरी दूसरों की सुखी पत्नियों और अच्छी प्रकार बने हुए घरों को देखकर दुःखी
होता है. जो जुआरी सवेरे के समय पीले रंग के घोड़े पर बैठता है, वही शाम को कपड़ों के
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