ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे सोम! तुम इंद्र के साथ एक ही रथ पर बैठकर देवों की सेना के पास जाओ. शुद्ध
होते हुए, मरणरहित एवं ऋत्विजों द्वारा ढोये जाते हुए सोम स्तोताओं को धन देते हैं. (५)
परि सप्तिर्न वाजयुर्देवो देवेभ्यः सुतः. व्यानशिः पवमानो वि धावति.. (६)
घोड़े के समान युद्ध के इच्छुक, दीप्तिशाली, देवों के लिए निचोड़े गए, पात्रों में फैले हुए
एवं दशापवित्र द्वारा शुद्ध होते हुए सोम चारों ओर दौड़ते हैं. (६)
सूक्त—१०४ देवता—पवमान सोम
सखाय आ नि षीदत पुनानाय प्र गायत. शिशुं न यज्ञैः परि भूषत श्रिये.. (१)
हे मित्र स्तोताओ! बैठो और शुद्ध होते हुए सोम के लिए स्तुतियां गाओ. जैसे मां-बाप
बच्चें को आभूषण आदि से सजाते हैं, उसी प्रकार यज्ञयोग्य हव्यों से सोम को सजाओ. (१)
समी वत्सं न मातृभिः सृजता गयसाधनम्. देवाव्यं१ मदमभि द्विशवसम्.. (२)
हे ऋत्विजो! घर देने वाले, देवों के रक्षक, नशा करने वाले एवं परम शक्तिशाली सोम
को मातारूप जल से इस प्रकार मिलाओ, जैसे बछड़े को गाय के पास ले जाते हैं. (२)
पुनाता दक्षसाधनं यथा शर्धाय वीतये. यथा मित्राय वरुणाय शंतमः.. (३)
हे ऋत्विजो! शक्ति देने वाले सोम को दशापवित्र द्वारा शुद्ध करो. सोम वेग, देवों के
रसपान और मित्रावरुण की सुखप्राप्ति के साधन हैं. (३)
अस्मभ्यं त्वा वसुविदमभि वाणीरनूषत. गोभिष्टे वर्णमभि वासयामसि.. (४)
हे धनदाता सोम! हमारी वाणी इसलिए तुम्हारी स्तुति करती है कि तुम हमें धन दो. हम
तुम्हारे फेलने वाले रस को गाय के दूध के साथ मिलाते हैं. (४)
स नो मदानां पत इन्दो देवप्सरा असि. सखेव सख्ये गातुवित्तमो भव.. (५)
हे मदस्वामी सोम! तुम्हारा रूप दीप्त है. जैसे एक मित्र दूसरे मित्र को सच्चा मार्ग
बताता है, उसी प्रकार तुम हमें मार्ग बताने वाले बनो. (५)
सनेमि कृध्य१स्मदा रक्षसं कं चिदत्रिणम्. अपादेवं द्वयुमंहो युयोधि नः.. (६)
हे सोम! तुम हमारे साथ पुरानी मित्रता निभाओ. तुम अधिक खाने वाले, नम्रतारहित
एवं बाहरी-भीतरी माया वाले राक्षस को मारो और हमारे पापों से युद्ध करो. (६)
सूक्त—१०५ देवता—पवमान सोम
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