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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1534 of 1855

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Page 1534

रमणशील देव सोम का सेवन करते हैं. (५)
यमी गर्भमृतावृधो दृशे चारुमजीजनन्. कविं मंहिष्ठमध्वरे पुरुस्पृहम्.. (६)
यज्ञवर्धक जल ने गर्भ के समान सोम को यज्ञ में देखने के लिए पैदा किया है. सोम
सबके कल्याणकारक, कवि, परमपूज्य एवं बहुतों के द्वारा अभिलषित हैं. (६)
समीचीने अभि त्मना यह्वी ऋतस्य मातरा. तन्वाना यज्ञमानुषग्यदञ्जते.. (७)
सोम परस्पर मिली हुई, विशाल व यज्ञ की माता के समान द्यावा-पृथिवी के पास अपने
आप जाते हैं. यज्ञ का विस्तार करने वाले अध्वर्यु सोम को जल में मिलाते हैं. (७)
क्रत्वा शुक्रेभिरक्षभिर्ऋणोरप व्रजं दिवः. हिन्वन्नृतस्य दीधितिं प्राध्वरे.. (८)
हे सोम! तुम अपने ज्ञान व दीप्तिवाली इंद्रियों के द्वारा अंतरिक्ष का अंधकार नष्ट करो
एवं हिंसारहित यज्ञ में धारक रस को प्रेरित करो. (८)
सूक्त—१०३ देवता—पवमान सोम
प्र पुनानाय वेधसे सोमाय वच उद्यतम्. भृतिं न भरा मतिभिर्जुजोषते.. (१)
हे त्रित ऋषि! तुम दशापवित्र द्वारा शुद्ध होते हुए, यज्ञविधाता एवं स्तुतियों द्वारा प्रसन्न
सोम के प्रति उसी प्रकार तत्परता से वचन कहो, जिस प्रकार नौकर अपना वेतन मांगता है.
(१)
परि वाराण्यव्यया गोभिरञ्जानो अर्षति. त्री षधस्था पुनानः कृणुते हरिः.. (२)
गाय के दूध में मिले हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हैं. हरे रंग वाले
सोम शुद्ध होकर तीन स्थानों को अपना बनाते हैं. (२)
परि कोशं मधुश्रुतमव्यये वारे अर्षति. अभि वाणीर्ऋषीणां सप्त नूषत.. (३)
सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र द्वारा अपना रस द्रोणकलश में भेजते हैं. ऋषियों
के सात छंद सोम की स्तुति करते हैं. (३)
परि णेता मतीनां विश्वदेवो अदाभ्यः. सोमः पुनानश्चम्वोर्विशद्धरिः.. (४)
स्तुतियों के नेता, सबके देव, अहिंसित एवं हरे रंग के सोम रस निचोड़ने वाले तख्तों पर
बैठते हैं. (४)
परि दैवीरनु स्वधा इन्द्रेण याहि सरथम्. पुनानो वाघद्वाघद्भिरमर्त्यः.. (५)
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